Thursday, 21 February 2019

वह फैसला जिसने मुलायम सिंह को बना दिया था मुल्ला मुलायम...


इन दिनों पूरे देश में राम जन्मभूमि का मुद्दा छाया हुआ है। अयोध्या में राम मंदिर बनेगा या मस्जिद का निर्माण होगा, इसे लेकर सियासत जारी है। देश की  सर्वोच्च अदालत ने रामजन्मभूमि मामले पर सुनवाई अगले साल जनवरी तक टाल दी है। रामजन्मभूमि को लेकर कई आंदोलन हुए और एक आंदोलन ऐसा था, जिसमें उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने एक फैसला ऐसा लिया, जिससे वह मुल्ला मुलायम कहे जाने लगे।

दरअसल, आज से 28 साल पहले राम मंदिर निर्माण को लेकर साधु संत आयोध्या जा रहे थे और उनके श्रद्धालुओं की भीड़ भी अयोध्या पहुंच  रही थी। उस समय  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे  मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में कर्फ्यू लगा रखा था। इसके चलते श्रीराम के भक्तों को अयोध्या में जाने नहीं दिया गया। पुलिस ने  बाबरी मस्जिद के आस पास बैरिकेडिंग कर रही थी। इस सबको देखते हुए कारसेवकों की भीड़ बेकाबू हो गई और 30 अक्टूबर 1990 को पुलिस ने कारसेवकों पर गोली चला दीं, जिसमें पांच कारसेवकों की मौत हो गई। इससे गुस्साए कारसेवक हजारों की तादाद में 2 नवंबर 1990 को  अयोध्या में हनुमान गढ़ी तक पहुंच गए। यह जगह बाबरी मस्जिद के करीब थी। जैसे ही कारसेवक  वहां पहुंचे पुलिस ने उन पर ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी, जिसमें करीब डेढ़ दर्जन कारसेवकों की मौत हो गई। इन कासेवकों का  नेतृत्व उमा भारती, अशोक सिंघल और स्वामी वामदेवी कर रहे थे।

कहा जाता है कि मुलायम सिंह यादव ने इन कारसेवकों  पर गोली चलाने का आदेश दिया था। कारसेवकों पर इस तरह गोली चलाने का आदेश देने के कारण ही मुलायम सिंह को मुल्ला मुलायम कहा जाने लगा। उन्हें मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए  जाना जाने लगा और हिंदुओं का  विरोधी समझा जाने लगा। हालांकि इस घटना के लगभग 23 साल बाद मुलायम सिंह ने इसे अपनी बड़ी भूल बताया, लेकिन उसके दाग आज तक उनके दामन पर लगे हैं और आज भी मुलायम सिंह को मुल्ला मुलायम कहा जाता है।

 पुलिस के इस तरह गोली चलाने की खूब निंदा हुई और इसके परिणाम स्वरूप दो साल बाद नवंबर 1992 में उग्र ​हिंदू नेताओं की अगुवाई में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया। इसके बाद  आए चुनावों में मुलायम सिंह बुरी तरह हार गए थे।


माया ने बाप-बेटे में डाली दरार, मुलायम ने अखिलेश को जमकर घेरा


समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने बहुजन समाज पार्टी के साथ आधी-आधी सीटों पर 2019 के लोकसभा चुनाव लड़ने के अपने बेटे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के फैसले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्‍होंने गुरुवार को अखिलेश पर करारा प्रहार करते हुए कहा है कि गठबंधन को लेकर मैं बात करता तो समझ में आता, किन्तु अब लोग कह रहे हैं कि लड़का गठबंधन की बात करके चला गया। उन्‍होंने कहा है कि समाजवादी पार्टी को उसी के लोग खत्‍म करने में लगे हुए हैं।

मुलायम सिंह यादव ने सपा कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा कि यूपी में सपा की लड़ाई सीधे भारतीय जनता पार्टी से है, लड़ाई में तीसरा कोई दल नहीं है। उन्‍होंने कहा है कि, 'अखिलेश ने अब बसपा से गठबंधन कर लिया है और सुनने में आ रहा है कि सीटें आधी ही मिली हैं। आधी सीट होने से हमारी अपनी पार्टी के लोग तो खत्म ही हो गए। कोई मुझे बताए कि सीटें आधी किस आधार पर दी गई।'

बसपा के साथ गठबंधन करने और आधी सीटों पर हामी भरने पर मुलायम सिंह ने अखिलेश यादव को जिम्मेदार करार दिया है। मुलायम सिंह ने कहा है कि सपा को अपनी ही पार्टी के लोग खत्म करने में लगे हुए हैं। अकेले अपने दम पर पार्टी ने सूबे में तीन बार सरकार बनाई है, किन्तु  यहां तो लड़ने से पहले ही आधी सीटें मिली हैं। हम राजनीति नहीं कर रहे हैं, लेकिन हम सही बात को सबके सामने रख रहे हैं।


सोना के भावों में कमी तो चांदी ने लगाई जोरदार छलांग, कुछ ऐसे है आज के भाव


अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दोनों कीमती धातुओं में रही तूफानी तेजी के बीच ऊँचे भाव पर खुदरा जेवराती खरीद में आयी सुस्ती से बुधवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 210 रुपए लुढककर 34,470 रुपए प्रति दस ग्राम पर आ गया। इस दौरान औद्योगिक ग्राहकी बढने से चांदी 450 रुपए की छलांग लगाकर आठ माह के उच्चतम स्तर 41,800 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई। लंदन का सोना हाजिर 4.20 डॉलर की बढत में 1,343.40 डॉलर प्रति औंस बोला गया।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल का अमेरिकी सोना वायदा भी 0.60 डॉलर की मजबूती के साथ 1,345.40 डॉलर प्रति औंस बोला गया। बाजार विश्लेषकों ने बताया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशकों ने सतर्कता बरतते हुए पीली धातु में निवेश को अधिक तरजीह दी।

जानकारी के लिए बता दें इसके अलावा अमेरिका के सरकारी बांड यील्ड में आई गिरावट के कारण दुनिया की अन्य छह प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर के कमजोर पड़ने से भी सोने की चमक बढी है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चांदी हाजिर 0.08 डॉलर की तेजी के साथ 16.02 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गई। वैश्विक तेजी के बीच स्थानीय बाजार में ग्राहकी घटने से सोना स्टैंडर्ड 210 रुपए फिसलकर 34,470 रुपए प्रति दस ग्राम पर आ गया।


पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल, यह है आज के भाव


सप्ताह के चौथे यानि गुरुवार दिल्ली में पेट्रोल 15 पैसा महंगा हुआ तो वहीं डीजल में 26 पैसे का उछाल देखने को मिला। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने अगले वित्त वर्ष में अमेरिका से 30 लाख टन कच्चा तेल खरीदने के लिए 1.5 अरब डॉलर का वार्षिक सौदा किया है। बता दें क‍ि पेट्रोल और डीजल की गुरुवार की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से कोई खास उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिला।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 21 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 71.15 रुपये प्रति लीटर है। डीजल की कीमत 66.33 रुपये प्रति लीटर रहेगा। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 76.74 रुपये प्रति लीटर रहेगा। डीजल की कीमत मुंबई में 69.42 रुपये प्रति लीटर रहेगा। 20 फरवरी से कीमतों की तुलान की जाए तो कुछ पैसें महंगे हुए हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली में 20 फरवरी की तुलना में पेट्रोल 15 पैसा महंगा हुआ तो वहीं डीजल में 26 पैसे का उछाल देखने को मिला। वहीं कोलकाता में बीते दिनों के मुताबिक, 20 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 71 रुपये प्रति लीटर बिका। डीजल की कीमत 66.7 रुपये प्रति लीटर था। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 76.59 रुपये प्रति लीटर बिका तो डीजल 69.25 रुपये प्रति लीटर रहा।


वंदे भारत एक्सप्रेस पर तीसरी बार चले पत्थर, मामले की जांच कर रहा रेलवे


देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस को चलते हुए अभी 4 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं और ट्रेन को क्षति पहुंचाने की घटनाएं दिन ब दिन सामने आ रही हैं। बुधवार को वनडे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर एक बार फिर पत्थर फेंके गए, जिसमें ट्रेन की एक खिड़की का कांच टूट गया। हालाँकि, गनीमत यह रही कि इस पत्थरबाज़ी में कोई घायल नहीं हुआ।

बता दें कि यह इस तरह की पहली घटना नहीं है। गत दो महीनों में इस ट्रेन पर पत्थरबाजी की यह तीसरी घटना मीडिया में आई है। बुधवार को सुबह लगभग 8 बजे फिरोजाबाद के हीरनगांव रेलवे स्टेशन के पास कुछ उपद्रवी तत्वों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके थे। ट्रेन दिल्ली से वाराणसी की यात्रा पर थी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस महीने यह ऐसी दूसरी घटना है। इससे पहले इसी महीने दिल्ली के सदर इलाके में ट्रेन पर पत्थर बरसाए गए थे।

इस घटना में भी ट्रेन का एक शीशा टूट गया था। इससे पहले 20 दिसंबर 2018 को ट्रेन के ट्रायल के अंतिम दौर में भी मथुरा के समीप ट्रेन पर पत्थर फेंके गए थे, इस घटना में भी ट्रेन की एक खिड़की टूटी थी। बुधवार की घटना उस समय मीडिया में आई जब एक यात्री ने ट्वीट कर C2 कोच में खिड़की के टूटे हुए कांच की फोटो शेयर की। रेलवे फिलहाल मामले की जांच कर रहा है।


इस गांव में चाय के लिए तरस जायेंगे आप, जानिए हैरान कर देने वाली वजह


इंसान बिना चाय-कॉफी के अपने दिन की शुरुआत नहीं कर सकता है. वहीं हर बात के लिए चाय कफ लगती ही है. सुबह उठते ही हर व्यक्ति को चाय की चुस्की तो चाहिए ही होती हैं. भारत के गांव में दूध की कमी हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता. लेकिन आज हम आपको ऐसे ही गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां दूध की कमी की वजह से चाय मिल पाना मुश्किल होता हैं, हांलाकि इस गाँव में कई गाय-भैस हैं. लेकिन सभी को दूध नहीं मिल पाता. अब ऐसा क्यों हैं आइये हम बताते हैं आपको.

बात दें, यह गाँव आगरा से करीब 2 किलोमीटर की दुरी पर बसा हुआ है जिसका नाम कुआं खेड़ा है. यह एक ऐसा गाँव जहाँ पर चाय की एक दुकान भी नहीं है और साथ ही वहां दूध बेचना भी पाप है. जी हाँ, इस गाँव में आपको दूध नहीं मिलेगा और जब दूध नहीं मिलेगा तो चाय तो भूल ही जाइए. गाँव के लोगों का यह मानना है कि अगर कोई गलती से भी गाँव में दूध बेचेगा तो दुःख और मुसीबतों का एक पहाड़ गाँववालों पर टूट पड़ेगा.

यहाँ रहने वालों ने बताया कि पिछले कई सालों से दूध नहीं बेचा जाता है और दूध ना होने की वजह से यहाँ के लोगों ने कभी चाय नहीं पी. सबसे ख़ास बात तो यह है कि यहाँ के हर घर में आपको गाय और भैंस बंधी रहती है. यहाँ पर दूध का लोग घर में इस्तेमाल करते हैं और जो दूध बचता है उसे दूसरे गाँव के लोगों को बिना पैसे के ही दे देते हैं.


यहां भाई बहन ही कर लेते हैं शादी, ऐसे हैं कुछ अजीब रिवाज


दुनिया में अजीब परम्पराएं निभाई जाती हैं. उनमे से भारत देश भी एक है जिसमें कई अनोखे काम सुनने को मिलते हैं. ऐसे ही हम कुछ और रीती रिवाज के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको हैरान कर देंगे. भारत का हर क्षेत्र अपने विभिन्न रीती-रिवाजों के लिए जाना जाता हैं. आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर एक अनोखा रिवाज हैं और उसके तहत भाई-बहन आपस में शादी करते हैं. तो आइये जानते हैं इसके बारे में.

शादी को लेकर बहुत सी परंपरा होती हैं जिन्हें निभाया जाता है, लेकिन कहीं भी ऐसा नहीं होता कि भाई बहन की ही शादी करवा दी जाये. लेकिन  छत्तीसगढ़ में एक धुरवा आदिवासी समाज है, जहां पर यह परंपरा निभाई जाती है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में बस्तर की कांगेरघाटी के इर्द-गिर्द बसे धुरवा जाति के लोग बेटे-बेटियों की शादी में अग्नि को नहीं बल्कि पानी को साक्षी मानते हैं. यानि भाई बहन ही शादी के बंधन बंध जाते हैं.

इस समाज की सबसे अलग प्रथा है कि इनके यहां बहन की बेटी से मामा के बेटे (ममेरे फुफेरे भाई बहन) की शादी होती है. इसी के साथ अगर कोई ऐसा करने से मना करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है. यहीं नहीं यहां बाल विवाह का भी चलन है. हालांकि, अब इस परंपरा को धीरे-धीरे खत्म करने के लिए कोशिशें शुरू हो गई हैं.



यहां स्तन के आकार के होते है फूल, ऐसे ही अजीब हैं कुछ अन्य पौधे


दुनिया में कई तरह के पेड़ पौधे पाए जाते हैं जिसके बारे में आपको पता भी नहीं होगा. आज हम आपको ऐसे फूलों के बारे में बताने जा  रहे हैं जो देखकर आप भी हैरान रह जायेंगे. कुछ ऐसे ही अजीब पौधों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी संरचना मानव अंगों के समान दिखाई देती हैं. ये पौधे नैचरल है इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. इन पौधों को पहली बार देखने पर मन में आशंकित रूप से मानव अंगों का ही चिंतन आता हैं. तो आइये आज हम बताते हैं आपको कुछ ऐसे ही पौधों के बारे में जो दिखते हैं कुछ जाने-पहचाने से.

ट्रॉपिकल पीचर प्लांट

यह पौधा एक मांसाहारी पौधा कहा जाता है और बहुत ही अजीब तरह का दिखाई देता है. इस पौधे की सुराहीदार गर्दन होती है जो अपने अंदर जाने वाले छोटे-छोटे जीवो को पचा लेती है.

लूफा

यह एक प्रकार का पौधा होता है जिसमे आने वाला फल महिला के बूब्स की तरह होता है. यह फल वियतनाम में उगने वाले एक पौधे में लगता है और दिखने में बहुत ही आकर्षक और हूबहू महिलाओं के बूब्स की तरह होता हैं.

इटैलियन पौधा

यह एक इटैलियन पौधा होता है जो किसी पुरुष के शरीर की बनावट का होता है. इसे देखकर कोई भी महिला शरमा जाए. यह मेल पौधे के नाम से भी पहचाना जाता है.

बंदर छाप

यह एक प्रकार का बंदर छाप पौधा होता हैं दिखने में यह पूरी तरह बंदर की तरह होता हैं और इसका असली नाम ड्रेकुला सिमिआ हैं जो बंदर छाप नाम से पहचाना जाता है.





शरीर को ऐसे फायदे पहुंचाता है उपवास


आपको बता दें लोगों के बीच फास्टिंग यानि उपवास का चलन काफी लोकप्रिय हो रहा है। एक दिन या हफ्ते के कुछ दिन भूखा रहने से आपकी सेहत पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि इससे आपका स्वास्थ्य सुधरता है। फास्टिंग करने से आपके शरीर के अन्दर बहुत से बदलाव होते हैं, जो हमारी सेहत के लिए फायदेमंद साबित होते हैं।

जानकारी के लिए हम आपको बता दें फास्टिंग करने से दिमाग की कार्य करने की क्षमता दुरुस्त होती है। फास्टिंग से ब्रेन डिराइव्ड न्यूरोट्रोफिक फैक्टर नामक प्रोटीन निकलता है, जो हमारे दिमागी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है साथ ही यह प्रोटीन दिमाग संबंधित कुछ बीमारियों से भी बचाता है। वही फास्टिंग करने से हमारी त्वचा से मुंहासे दूर हो जाते हैं। फास्टिंग करने के दौरान हमारा शरीर कई टॉक्सिन को बाहर निकालता है और साथ ही दूसरे शारीरिक अंगों का संचालन भी सुचारू रूप से होता है।

आपको बता दें फास्टिंग करने से आपका शरीर बहुत जल्द और सुरक्षित तरीके से वजन कम करता है। इस प्रक्रिया में शरीर भूखे रहने पर अतिरिक्त फैट को ऊर्जा में बदलता है। आजकल कई एथलीट इस प्रक्रिया को अपनाकर लाभ उठा रहे हैं। इस फास्टिंग में व्यक्ति ज्यादातर घंटों तक खुद को भूखा रखता है और कुछ घंटों के लिए खाता है।


शिवजी के इस मंदिर में सोमवार को नहीं बल्कि बुधवार को होती है पूजा


हमारे देश में कई ऐसे मंदिर हैं जिनके अपने अलग ही रहस्य हैं. ऐसे ही हम बात कर रहे हैं एक शिव मंदिर की जिसमें एक खास बात है. भगवान् शिव की आराधना हर कोई करता है लेकिन बात करें सावन की तो इस समय शिवजी के भक्तों की भीड़ कुछ ज्यादा ही होती है. सोमवार का दिन शिवजी का खास दिन माना जाता है. इसलिए शिवजी के हर मंदिर में सोमवार को विशेष पूजा की जाती हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें सोमवार नहीं बल्कि बुधवार के दिन को शिवजी की विशेष पूजा की जाती हैं. जी हाँ, आइये आपको बता देते हैं इस मंदिर के बारे में.

दरअसल, लखनऊ में मोहान रोड पर स्थित ये बुद्धेश्वर महादेव मंदिर है. इस मंदिर में सोमवार की जगह बुधवार को खास पूजा होती है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर त्रेतायुग में निर्मित है. अर्थात भगवान राम के काल में इस मंदिर की स्थापना की गई थी. मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण ने की थी. अब इस मंदिर का नाम बुद्धेश्वर क्यों पड़ा और बुधवार को ही क्यों होती है इस मंदिर में पूजा तो आइये जान लेते हैं.

भगवान राम के आदेश पर लक्ष्मणजी माता सीता को लेकर बन में छोड़ने जा रहे थे. जब वह इस स्थान पर पहुंचे तो उनके मन में माता सीता की सुरक्षा को लेकर चिंता उठने लगी. ऐसे में उन्होंने इस स्थान पर भगवान शिव का ध्यान किया. भगवान शिव उन पर प्रसन्न हुए और प्रकट होकर उनका संदेह दूर करते हुए उन्हें माता सीता के विराट स्वरूप का दर्शन कराया. जिस दिन यह घटना घटी उस दिन बुधवार था. इसीलिए यहां स्थापित शिवलिंग को बुधेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. इसलिए यहां सोमवार की जगह बुधवार को खास पूजा होती है.