Sunday, 11 March 2018

रहस्यों से भरी है जया प्रदा की जिंदगी, शादीशुदा से शादी


पूर्व लोकसभा सांसद और सिने अभिनेत्री जयाप्रदा ने आजम खां को लेकर दिए अपने विवादित बयान से एक बार फिर सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। शुरू से ही जया प्रदा की जिंदगी रहस्य और रोमांच से भरी रही है। उनका जीवन हमेशा किसी न किसी वजह से चर्चाओं में रहा है। जानिए, उनके जीवन से जुड़ी रोमांचक बातें...


जयाप्रदा का असली नाम ललिता रानी है। फिल्मों में आने के बाद जैसे कई कलाकारों के नाम बदलते हैं वैसे ही ललिता रानी जया प्रदा हो गईं। ललिता उर्फ जया का जन्म 3 अप्रैल 1962 में आंध्र प्रदेश के राजाहमुंडरी जिले में हुआ था। जया के पिता कृष्णा राव तेलुगू फिल्मों के फाइनेंसर थे।


फिल्मी बैकग्राउंड होने की वजह से ही जया फिल्मों की तरफ आकृष्ट हुईं। जया के फिल्मी कैरियर की शुरुआत तेलुगू फ़िल्म 'भूमिकोसम' से हुई। इसमें जया का छोटा सा रोल था। जयाप्रदा की शादी 1986 में श्रीकांत नहाटा से हुई, जो पहले से शादीशुदा थे। नहाटा के पहली पत्नी से तीन बच्चे थे। शादी पर कई विवाद उठे, क्योंकि जयाप्रदा से शादी करने से पहले उन्होंने पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया था।


जया प्रदा का मामला इसलिए बहुत रोचक है क्योंकि जया से शादी करने के बाद भी उनके पति अपनी पहली बीवी से अलग नहीं हुए। जया से शादी करने के बाद भी उन्होंने अपनी पहली बीवी से बच्चे पैदा किए और जया उनके पति और पति की पहली बीवी खुशी-खुशी साथ रहने पर सहमत हुए थे।


जयाप्रदा-श्रीकांत के कोई संतान नहीं है, लेकिन जब वो उनसे अलग हुईं, तब उन्होंने बच्चे की चाहत शब्दों में प्रकट की थी। फिल्मी करियर को चरम पर पहुंचाने के बाद जयाप्रदा तेलुगू देसम पार्टी में 1994 में शामिल हुईं। उन्हें तेदेपा में लाने वाले एनटी रामाराव थे।


2000 के आसपास जया तेदेपा छोड़ कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं। माना जाता है कि जया प्रदा को पार्टी में लाने के पीछे अमर सिंह की बड़ी भूमिका थी। अमर सिंह उनके मित्र और राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं। अमर और जया के रिश्तों के बारे में गॉसिप लगातार राजनीति में बनी रहती है।


2004 में उन्होंने रामपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और 85 हजार वोटों से जीतीं। पांच साल तक सांसद रहने के बाद 2009 में एक बार फिर जयाप्रदा चुनाव जीतीं। जब अमर सिंह सपा से अलग हुए तो जया भी उनके साथ अलग होकर लोकदल पार्टी में शामिल हो गईं। बाद में फिर वह सपा के साथ आ गईं। जयाप्रदा के दूसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ने के दौरान उनके और आजम खां के बीच रिश्तों में तल्खी आ गई थी।