Monday, 14 May 2018

चली इतनी तेज आंधी कि पलट गईं खड़ी गाड़ियां, मुड़ गए हाईटेंशन टावर




देश के कई राज्यों में तूफान-आंधी और बारिश ने जमकर कहर बरपाया. करीब छह राज्यों में 41 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हैं. दिल्ली-एनसीआर और आस पास के इलाकों में 109 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान ने दस्तक दी. इसका असर यह हुआ कि दिल्ली-कानपुर हाईवे पर खड़ी कई गाड़ियां पलट गई. यही नहीं, उत्तर प्रदेश प्रतापगढ़ में कई जगह तो हाईटेंशन टावर तक मुड़ गए.

मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को भी राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तराखंड के कुछ इलाकों में आंधी-तूफान के साथ बारिश हो सकती है.

वहीं, महाराष्ट्र के विदर्भ, छत्तीसगढ़, बिहार, तेलंगाना, आंध्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, लक्षद्वीप और केरल में भी आंधी-तूफान व बारिश होगी.

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हरियाणा में तीन दिन से 44, से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हो रहा था. इससे 20 हजार फुट की ऊंचाई तक गर्म हवा ऊपर उठ रही थी और वातावरण में 90 प्रतिशत तक नमी हो गई थी.

यह नमी भी गर्म हवाओं के साथ ऊपर पहुंच गई. इससे हरियाणा में लोकल वेदर (चक्रवाती हवा) सिस्टम बन गया. यह शनिवार रात से ही एक्टिव हो गया था. इसी से दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में तेज रफ्तार से आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई.

दो दिन पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि दिल्ली में 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा चलेगी, लेकिन दिल्ली में साढ़े चार बजे 109 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान ने दस्तक दी.

इससे मेट्रो, ट्रेन, प्लेन और सड़क यातायात सभी थम गए. कई जगह पेड़, छत और दीवारें गिर गईं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1983 में मानसून सीजन के दौरान 151 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली थी. नेशनल एयरोनॉटिकल लेबोरेटरी और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंसेज बेंगलुरू की द विंड एनवायर्नमेंट इन इंडिया की रिपोर्ट में यह दर्ज हुआ था.