Friday, 18 May 2018

स्कूल फीस के लिए बर्तन मांजे, पंक्चर बनाए, ऐसी है इस एक्टर के संघर्ष की कहानी


साइकिल के पंचर बनाए, कोठियों में बर्तन धोए, किराने की दुकान पर काम किया और आटे की चक्की चलाई। ये है लगान और 'गंगाजल' जैसी हिट फिल्मों में काम कर चुके यशपाल शर्मा के संघर्ष की कहानी। एक्टिंग में नाम कमा चुके यशपाल शर्मा अब फिल्म डायरेक्ट करने जा रहे हैं। ये फिल्म हरियाणआ के शेक्सपीयर कहे जाने वाले फोक आर्टिस्ट और कवि लखमीचंद के जीवन पर आधारित होगी। यशपाल शर्मा खुद भी हरियाणा से हैं। एक्सक्लूसिव बातचीत में यशपाल शर्मा ने अपने करियर, संघर्ष और कामयाबी के बारे में बताया।

यशपाल शर्मा ने बताया कि 22, साल की उम्र में वे हरियाणा के हिसार में अपने घर से भागकर दिल्ली आ गए थे। एक्टिंग को लेकर ऐसी धुन थी कि अखबार में नाटक 'अंधा युग' के मंचन की खबर पढ़कर इसे देखने का मन बना लिया और निकल पड़े। ये नाटक उन्हें इतना पसंद आया था कि 4 महीने तक लौटकर घर नहीं गए। चार महीने बाद जब वे घर लौटे तो लोगों ने पूछा -भई कहां गया था? क्या करने गया था? जब यशपाल ने पूरी कहानी बताई और कहा कि एक्टिंग लाइन में जाना चाहते हैं तो घर में कोई खुश नहीं हुआ। घरवालों को लगता था कि एक्टिंग नौटंकी है, इसमें कोई पैसा नहीं मिलेगा।