Sunday, 24 June 2018

हीं बन सकती मां। लेकिन 45 की उम्र में महिला ने खून चूसने वाले जोंक से किया इलाज



नीना ने बताया कि पहली शादी से उसे एक बेटा है। लेकिन 2003 में दूसरी शादी के बाद वह एक और बच्चा चाहती थी। करीब पांच साल कोशिश करने के बाद डॉक्टर्स से जांच कराई। जांच में नीना के गर्भाशय में कई सारे म्योमास मिले। दरअसल, म्योमास एक प्री-कैंसरियस फिबरॉइड होता है। जो गर्भाशय के टिशु मसल्स में ग्रो होता है। 20% से 80% महिलाओं में 50 साल की उम्र तक ये फिबरॉइड डेवलप हाेता है।

- फिबरॉइड के दौरान हैवी ब्लीडिंग, पेट में दर्द, पेट का निचला हिस्सा बढ़ना, बार-बार टॉयलेट आना, सेक्स के दौरान दर्द और पीठ के निचले हिस्से में दर्द के सिमटम्स दिखाई देने लगते हैं। इस केस में प्रेग्नेंट होने की संभावना न के बराबर होती है।

- डॉक्टर्स ने नीना को बताया कि उसके फिबरॉइड को कई तरह मेडिसिन या सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। इसके बाद नीना ने प्रेग्नेंसी की बात दिमाग से निकाल दी और फिबरॉइड के ट्रीटमेंट के बारे में साेचने लगी। नीना ने लीच थैरेपी से इलाज करने का मन बना लिया था।

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