Sunday, 24 June 2018

यहां साल में 105 दिन रहता है अंधेरा, एक गलती समझो काम खत्म


कमाल की बात है 6 महीने की रात और 6 महीने का दिन। भला ऐसे कैसे हो सकता है। अगर भारत में ऐसा हो जाए तो हम कैसे जिएंगे। यकीन मानिए ऐसा हो जाने पर आप अपनी जिंदगी से तंग आ जाओगे।

यहां तक की पागल भी हो सकते हो। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जगह के बार में बताएं जहां 105 दिन तक अंधेरा छाया रहता है। यहां के लोग माइनस 55 डिग्री सेल्सियस में भी काम करते हैं। इस तापमान में इंसानों की हड्डियां भी काम करना बंद कर देती है और वहां के वैज्ञानिक ऐसे हालात में काम करते हैं। यहां के लोग और किन-किन परेशानियों का सामना करके जिंदा रहते हैं आइए जानते हैं।

यह दुनिया की पहली जगह बदलने वाली लैब है इसका नाम है हैली सिक्स। इस विशाल ढांचे के भीतर अत्याधुनिक लैब और रहने का इंतजान है बड़े आकार के बावजूद लैब आराम से इधर उधर ले जाई जा सकती है।

हैली सिक्स को हाल ही में काफी दूर ले जाना पड़ा। लैब के पास बर्फ में एक बड़ी दरार उभरने के बाद ऐसा किया गया। अनुमान है कि एक विशाल हिमखंड अलग होकर समुद्र में घुलने जा रहा है।

अंटार्कटिक में तैनात हैली सिक्स कई तरह की जानकारियां जुटाती है। ब्रह्मांड में होने वाली मौसमीय हलचल, ओजोन परत की दशा, ध्रुवीय वातावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अहम जानकारी यहीं से आती है।

लाल बॉक्स सा दिखता ये ढांचा वैज्ञानिक का मीटिंग पॉइंट सा है। गर्मियों में यहां 70 लोग रहते है सर्दियों में सिर्फ 16।

साल में 105 दिन ऐसे होते हैं जब यहां 24 घंटे अंधेरा रहता है। अंतहीन सी लगने वाली रात का नजारा गजब का होता है।

लैब आठ मॉड्यूल्स को मिलाकर बनाई गई है हर हिस्से में हॉइड्रॉलिक पाये हैं, इन पायों में स्की जैसे पैड होते हैं। इन पैड्स के सहारे ढांचे बर्फ में फिसलते हुए एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जाते हैं।

तस्वीरों में ठंड का अहसास नहीं होता। हैली सिक्स में काम करने वाले वैज्ञानिकों को -55 डिग्री सेल्सियस की ठंड का सामना करना पड़ता है। इतनी सर्दी में जिंदगी कुछ ही मिनट में जम जाती है।

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