Wednesday, 13 June 2018

‘व्हाइट गोल्ड’ से कम नहीं है ऊंटनी का दूध, नहीं होंगी ये बीमारी


आप सभी ने गाय, भैस, बकरी का दूध तो पिया होगा लेकिन क्या आपने कभी ऊंटनी का दूध पीया है।
राष्ट्रीय उष्ठ अनुसंधान केंद्र, बीकानेर राजस्थान में ऊंटनी के दूध से कई लोगों का मानसिक और कुपोषण का इलाज किया जा चुका है।

 बीकानेर में ऊंटनी के दूध से बनी आइसक्रीम, फ्लेवर्ड मिल्क, कुल्फी, चाय, कॉफी, गुलाब जामुन, पेड़े, बर्फी, चॉक्लेट, शुगर फ्री लस्सी भी उपलब्ध है। यहां तक की विदेशों में ऊंट के दूध की बहुत डिमांड है। कई तरह के दवाइयों में ऊंटनी के दूध का इसतेमाल किया जाता है। आइए जानते है इस रेगिस्तान के जहाज के दूध के बेमिसाल फायदों के बारे में।

डायबिटिज का खतरा नहीं,

ऊंटनी के दूध पीने से डाइबिटीज का खतरा भी कम हो जाता है। ऊंटनी के दूध में सिर्फ 52 फीसदी ही इंसुलिन होता है और इस दूध के इतने फायदे को देखते हुए इसका इस्तेमाल दवाई बनाने के लिए भी किया जा रहा है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता,

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में ऊंटनी का दूध अमृत के सामान है, ये एक प्राकृतिक एन्टीबियोटिक्स हैं जो बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को रोगों से लडऩे की जबरदस्त क्षमता प्रदान करता हैं।
कैल्शियम,

ऊंटनी के दूध से हड्डियों बहुत मजबूत होती हैं, क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता हैं।


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