Friday, 29 June 2018

वैज्ञानिकों के लिए रहस्य है भीमकुंड, आपदाओं से पहले देता है संकेत


आज के वक्त में यदि लोग किसी भी रहस्यमयी चीज को देखते हैं तो सबसे पहले उसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को जानने का प्रयास करते हैं, लेकिन भारत के मध्यप्रदेश राज्य के छतरपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक भीमकुंड को आज तक कोई भी वैज्ञानिक कारण नहीं मिल पाता है। भीमकुंड आज भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बना हुआ है। भीमकुंड के बारे में कहा जाता है कि इसकी गहराई आज तक कोई नहीं जान सका है। इस कुंड का जल भी साफ और पीने योग्य है।

इस कुंड के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि जब भी दुनिया में कोई प्राकृतिक विपत्ति आने वाली होती है तो यह कुंड पहले ही संकेत दे देता है। बताया जाता है जब हिन्द महासागर में 2004 में आये भूकंप और सुनामी का संकेत इस कुंड ने पहले दें थी।

भीमकुंड का उल्लेख भारत के वैदिक ग्रंथ और पुराणों में भी किया गया है। कहा जाता है कि महाभारत के पांच पांडवों और द्रोपदी का मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड से गहरा नाता रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने अज्ञातवास का कुछ समय इस क्षेत्र में बिताया था। जिस जगह उनके रहने के प्रमाण मिलते हैं। वह छतरपुर जिले में भीमकुंड के नाम से जाना जाता है। पर्यटन प्रेमियों के लिए यह एक रमणीक जबकि इतिहास और प्रकृति पर शोध करने वालों के लिए यह रहस्मयी स्थान है।

भीमकुंड के बारे में कहा जाता है कि यह भीम के गदा के प्रहार से बना था। मान्यताओं के अनुसार जब अज्ञातवास के समय जंगल में जब द्रोपदी को प्यास लगी तो उन्होंने भीम से पानी लाने को कहा। भीम ने वहां एक स्थान पर अपनी गदा से पूरी ताकत से प्रहार किया तो वहां पाताली कुंड निर्मित हुआ और अथाह जल राशि नजर आई जिसके बाद से इसका नाम भीमकुंड हो गया।

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