Sunday, 12 August 2018

अभी-अभी: थम गई एक और कलम की ताकत, नहीं रहे नोबेल पुरस्कार विजेता वीएस नायपॉल


भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक वीएस नायपॉल ने रविवार को इस दुनिया से अलविदा कह दिया। उन्होंने 85 साल की उम्र में लंदन में आखिरी सांस ली।

केवल अपनी कलम के दम पर पूरी दुनिया को झकझोर देने वाले लेखकों में नायपॉल की गिनती की जाती है। इनका नाम सबसे पहले लिया जाता है। उन्होंने लेखन के क्षेत्र में बहुत नाम कमाया है। उन्हें बुकर पुरस्कार और साहित्‍य का नोबुल पुरस्कार भी मिल चुका है। उनकी कृतियों में उनके क्रांतिकारी वि‍चारों की झलक मिलती है।

नायपॉल की पहली किताब 'द मिस्टिक मैसर' साल 1951 में प्रकाशित हुई थी। अपने सबसे चर्चित उपन्यास ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास को लिखने में उन्हें तीन साल से ज्यादा वक्त लगा। साहित्‍य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्‍हें अब तक कई पुरस्‍कर मिल चुके हैं। साल 2008 में द टाइम्‍स ने 50 महान ब्रिटिश लेखकों की सूची में नायपॉल को 7वां स्‍थान दिया था। खास बात तो यह थी कि इस लिस्‍ट में 1945 से बाद की कृतियों को जगहों दी जानी थी।

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