Sunday, 5 August 2018

ट्रेन में भीख मांगकर किन्नर गुड़िया ने जुटाए पैसे, बेटियों को गोद लेकर बना दी जिंदगी


वाराणसी के रामनगर में एक किनन्र ने समाज के लिए अनूठी मिसाल पेश की। दरअसल, जब गुड़िया पैदा हुई थी, तब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। ऐसा इसलिए क्योंकि वह एक किन्नर थी।

किन्नर होने की वजह से परिवार ने उसे बड़े भारी मन से पाला, लेकिन जैसे-जैसे गुड़िया बड़ी हुई समाज के तानों ने उसका जीना मुश्किल कर दिया था। समाज ने उसे इतना कोसा कि गुड़िया ने घर छोड़ने का फैसला कर लिया था। हालांकि घर छोड़ने के बाद गुड़िया की मुश्किलें कम नहीं हुईं बल्कि एक के बाद एक उसपर पहाड़ टूटता रहा। घर छोड़ने के बाद गुड़िया ने ट्रेनों में भीख मांगना शुरू कर दिया।

गुड़िया ने बताया कि जब हम बधाई के काम में जाते थे तो लोग कहते थे, कि ये जली है। लोग शमशान से पहले जल जाता है। तुम शमशान से उठकर आई। मेरे गुरु की दाल-रोटी झिनने लगी तो हमने गुरु का साथ छोड़ दिया और ट्रेन में भीख मांगने लगे। उसने ट्रेन में मांगे गए पैसों से दो पॉवरलूम लगाए और उससे गुजर-बसर का इंतजाम किया।

गुड़िया, बेटियों को लेकर कहती है कि “आज अगर बेटी को पढ़ाएंगे लिखाएंगे, अच्छा भविष्य देंगे तो मेरी बेटी बेटा से कम नहीं होगी। मेरी बड़ी बेटी विकलांग है, वह उतना पढ़ नहीं पाती और छोटी लड़की के बारे में तो हमारी दिल में तमन्ना है कि उसको डॉक्टर बनाएंगे।

गुड़िया ने जन्म के बाद जिंदगी के कई तरह के मुश्किलों का सामना किया है। समाज और परिवार से उपेक्षित गुड़िया को सिर्फ भाई और भाभी ने जिंदगी जीने का हौसला दिया। लिहाजा भाई के उस कर्ज को वह उसकी दिव्यांग बेटी को गोद लेकर उतार रही है। भाई की उस बच्ची को गुड़िया न सिर्फ दीनी तालीम दे रही है बल्कि उसे पॉवरलूम की बारीकियां भी सिखाकर अपने पैरों पर खड़े होने की हिम्मत दे रही है। जिस समाज ने किन्नर होने का पाप झेला,समाज के ताने सुने। लेकिन गुड़िया ने हौसला ना हारते हुए बड़े हौसले से करघे के जरिए न सिर्फ जिंदगी की खुशनुमा चादर बना रही है बल्कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का बड़ा संदेश भी समाज को दे रही है।

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