Thursday, 25 April 2019

पृथ्वी शॉ बायोग्राफी – Prithvi Shaw Biography


यूं तो कई लोग एक अच्छा क्रिकेटर बनने का सपना संजोते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही लोग अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर आगे बढ़ पाते हैं, उन्हीं में से एक है पृथ्वी शॉ – जिन्होनें महज 18 साल की उम्र में भारतीय टीम के लिए खेलते हुए अपने पहले टेस्ट मैच में शानदार शतक जड़कर न सिर्फ भारतीय टेस्ट किक्रेट टीम में अपनी जगह बना ली है, बल्कि क्रिकेट जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

वह डेब्यू टेस्ट में सबसे कम उम्र में शतक बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज भी बन गए हैं। आपको बता दें कि सलामी बल्लेबाज शॉ ने पहले तो 99 गेंदों में पहला टेस्ट शतक पूरा किया। इसके साथ ही उन्होंने अपना नाम रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज करा लिया।

साथ ही वह सचिन तेंदुलकर के बाद टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए शतक बनाने वाले भारत के दूसरे बल्लेबाज भी हैं। लेकिन टीम इंडिया के नया स्टार माने जा रहे पृथ्वी ने एक मामले में सचिन तेंदुलकर को भी पीछे छोड़ दिया।

पृथ्वी शॉ भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान हैं, जाहिर है कि किसी भी टीम की नेतृत्व करना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है, लेकिन पृथ्वी ने अपनी कुशल प्रतिभा के साथ अपनी इस जिम्मेदारी को निभाया और घरेलू स्तर पर भी लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते रहे यही नहीं साल 2018 की शुरुआत में ही न्यूजीलैंड में आयोजित अंडर-19 विश्वकप में बेहतरीन कप्तानी को लेकर वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में सुर्खियों में रहे।

हाल ही में जनवरी 2018 में हुई आईपीएल की नीलामी में उन्हें दिल्ली डेयरडेविल्स ने 1.2 करोड़ रुपये में खरीदकर अपने साथ जोड़ा है।

फिलहाल पृथ्वी शॉ का यहां तक का सफर इतना आसान नहीं था। पृथ्वी शॉ ने संघर्षों की पथरीली डगर पर पग भरते हुए सफलता का सफर तय किया है। आइए जानते हैं पृथ्वी शॉ के निजी जीवन से लेकर उनके करियर के यहां तक का सफर।

पृथ्वी शॉ का जीवन परिचय

वास्तविक नाम – पृथ्वी पंकज शॉ

व्यवसाय – क्रिकेटर (बल्लेबाज)

जन्मतिथि – 9 नवंबर 1999

जन्मस्थान – ठाणे, महाराष्ट्र, भारत

गृहनगर – विरार, महाराष्ट्र, भारत

पिता – पंकज शॉ

माता– नाम ज्ञात नहीं (मृत्यु)

स्कूल/विद्यालय – A.V.S. विद्यामंदिर, विरार, मुंबई,

रिज़वी स्प्रिंगफील्ड हाई स्कूल, मुंबई,

महाविद्यालय/विश्वविद्यालय  रिज़वी महाविद्यालय कला, विज्ञान और वाणिज्यिक, मुंबई,

शैक्षिक योग्यता – स्नातक

धर्म – हिंदू

जाति – वैश्य (मधेशी)

राष्ट्रीयता – भारतीय

कोच– राहुल द्रविड़

रिकॉर्ड – कैरियर टर्निंग प्वाइंट जब उन्होंने हैरिस शिल्ड क्रिकेट टूर्नामेंट में 546 रन बनाए।

साल 2013 में, सभी भारतीय विद्यालयों में हैरिस शिल्ड क्रिकेट टूर्नामेंट में सर्वाधिक 546 रन बनाए।

वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच में शतक मारा।

क्रिकेट की दुनिया में उभरते इस युवा किक्रेटर का जन्म 9 नवंबर 1999 को हुआ था। उनके पिता पंकज शॉ एक कपड़े के व्यापारी थे, पृथ्वी के पिता हमेशा से ही अपने बेटे को क्रिकेटर बनाना चाहते थे। या इस तरह कहें कि पृथ्वी अपनी पिता के बदौलत ही आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

पृथ्वी के परिवार में सब कुछ ठीक चल रहा था कि  पृथ्वी जब 4 साल के थे तो उनकी मां की मौत हो गई, जिससे पृथ्वी के परिवार में दुख का पहाड़ टूट पड़ा वहीं बचपन में ही मां का साया सिर से उठ जाने से पृथ्वी को गहरा सदमा पहुंचा था, लेकिन पृथ्वी के पिता पंकज शॉ ने इस घटना के बाद हिम्मत नहीं हारी और वे पृथ्वी की मां-पिता दोनों के रूप में अपने बेटे पृथ्वी की परवरिश में लग गए।

इसके साथ ही बेटे को क्रिक्रेट बनने का सपना पूरा करने के लिए पृथ्वी के लिए बचपन से ही किक्रेट कोचिंग का इंतजाम करते रहे  उन्होनें महज 3 साल की उम्र में ही पृथ्वी का विराट की क्रिकेट एकेडमी में दाखिला करा दिया।

पृथ्वी आज किक्रेट के सबसे युवा सितारे बनकर उभरे हैं तो  इसके पीछे सबसे बड़ा रोल उनके पिता का ही है। पिता पंकज शॉ ने ही पृथ्वी को उनके सपनों को देखना और जीना सिखाया है।

पृथ्वी के करियर के लिए पंकज शॉ ने काफी त्याग और बलिदान किया है, यहां तक कि उन्होनें पृथ्वी के लिए अपने बढ़ते परिधान कारोबार को बंद कर दिया, जहां वह थोक विक्रेताओं से परिधान खरीदते थे और सूरत और बड़ौदा में बेचते थे और वे अपना व्याापर छोड़कर मुंबई भी चले गए।

आपको बता दें कि पृथ्वी शॉ का परिवार असल में बिहार के गया का रहने वाला है, लेकिन अब वे लोग मुंबई में रहने लगे हैं।

पिता का बिजनेस बंद होने के बाद घर में आर्थिक तंगी रहने लगी क्योंकि बचत के पैसे से भला कितने दिन घर चलेगा। लेकिन जब पृथ्वी को छात्रवृत्ति मिलनी शुरू हुई, तो उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। जिसके चलते शिवसेना के विधायक संजय पोटनीस ने उन्हें वोकला में एक घर दिया, जो बांद्रा में उनके ट्रेनिंग ग्राउंड के पास था।

वहीं उनके पिता, पृथ्वी के लिए कलिना में एयर इंडिया के मैदान पर गेंदबाजी करते थे और पृथ्वी को क्रिकेट प्रक्टिस कराते थे।

महज 3 साल की उम्र में ही पृथ्वी ने क्रिक्रेट खेलना शुरु कर दिया था, शुरु से ही उनका मकसद क्रिकेटर बनने का था लेकिन फिर भी जमाने के साथ चलने के लिए उन्होनें अपनी पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया।

आपको बता दें कि पृथ्वी शॉ ने मुंबई के ए.वी.एस विद्यामंदिर और रिजवी स्प्रिंगफील्ड हाईस्कूल से अपने शुरुआती शिक्षा हासिल की है।

सबसे कम उम्र के किक्रेट स्टार पृथ्वी शॉ का क्रिक्रेट खेलने की शैली भी कुछ खास है, उनकी अपनी प्रखर शैली के चलते ही वे आज भारतीय क्रिक्रेट टीम के उभरते हुए सितारा हैं और अपनी बल्लेबाजी से सबको चौंका दिया है।

आपको बता दें कि पृथ्वी शॉ अपनी दाएं हाथ से ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी करते हैं और दाएं हाथ से ही कामचलाऊ ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी कर लेते हैं फिलहाल पृथ्वी एक ऑलराउंडर हैं।

यही नहीं इस युवा क्रिकेटर में सचिन तेंदुलकर की खैल शैली की झलक मिलती है यही वजह है कि उनकी बल्लेबाजी और गेंदबाजी शैली की तुलना भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के साथ की जाती है।

वहीं पृथ्वी सिंह, सचिन तेंदुलकर को अपना आइडल भी मानते हैं। आपको बता दें कि सचिन तेंदलुकर भी दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे और दाएं हाथ से ही ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते रहे हैं। पृथ्वी  अपने आदर्श सचिन की तरह ही  गेंदबाजों पर हावी होकर खेलना पसंद करते हैं। पृथ्वी शॉ को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए भी दर्जा दिया गया है।

बेहतरीन प्रदर्शन से क्रिकेट जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले सबसे कम उम्र के राइजिंग स्टार पृथ्वी शॉ ने अपने किक्रेट करियर की शुरुआत मुंबई के सहारा परिसर बीरां से की थी। मुंबई की टीम से खेलते हुए उन्होनें अपने शानदार प्रदर्शन से बीरां टूर्नामेंट में जीत दिलवाई थी।

भारतीय किक्रेट टीम के पृथ्वी शॉ एक सलामी बल्लेबाज है, वे हमेशा से ही शानदार प्रदर्शन करते रहे हैं। इन्होनें दिलीप ट्रॉफी में अपना दमदार प्रदर्शन कर सबसे कम उम्र में शतक जड़कर एक और रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया।

आपको बता दें कि साल 2017 में दिलीप द्रॉफी के लिए, इंडिया रेड टीम की तरफ से बल्लेबाजी करते हुए शॉ ने शानदार शुरूआत की, और उन्होंने 249 गेंद का सामना करते हुए 18 चौके और एक छक्के से 154 रन की शतकीय पारी खेली।

उस वक्त पृथ्वी शॉ महज 17 साल के थे और  खास बात ये थी कि ये पृथ्वी का डेब्यू मैच था। आपको बता दें कि पृथ्वी शॉ से पहले यह रिकॉर्ड महान किक्रेटर सचिन तेंदुलकर के नाम था।

साल 2013 का वह दौर था जब मास्टर ब्लास्टर ने किक्रेट से संन्यास लिया था और पूरा मुल्क अगले सचिन तेंदुलकर के इंतजार की शुरुआत कर रहा था तभी मुंबई के 14 साल के बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने स्कूली क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाकर नया रिकॉर्ड अपने नाम किया था।

पृथ्वी शॉ तब हैरिस शिल्ड मैच में रिजवी स्प्रिंगफील्ड की तरफ से खेल रहे थे, तभी उन्होनें 330 गेंदो पर 546 रनों का बड़ा स्कोर बनाकर सबको चौंका दिया था।

आपको बता दें कि पृथ्वी शॉ ने इस पारी में 6 घंटे,7 मिनट तक बल्लेबाजी की और 85 चौके और 5 छक्के लगाए थे। वहीं उनकी इस शानदार पारी की मदद से रिजवी स्प्रिंगफील्ड स्कूल की टीम ने 991 रन का  बड़ा स्कोर खड़ा किया था, जबकि इसके खिाफ खेल रही सेंट् फ्रांसिस की टीम महज 93 रनों पर ही ऑलआउट हो गई थी। इस तरह रिजवी स्कूल की टीम ने शॉ की शानदार पारी के साथ 898 रन से इस मैच में जीत दर्ज की थी।

शॉ ने अपनी इस शानदार पारी के साथ मुंबई के स्कूल क्रिकेट के लिए अरमान जफर का बनाया पिछला रेकॉर्ड तोड़ दिया है। जफर ने साल 2010-11 में गील्स शील्ड ट्रॉफी के सेमीफाइनल में 498 रन बनाए थे। वहीं इस मैच के बाद से ही शॉ ने काफी सुर्खियां बटोरी थ। इसके लिए कई महान क्रिकेटर ने भी पृथ्वी शॉ की तारीफ की थी।

पृथ्वी शॉ के कोच राहुल द्रवि़ड़ हैं। राहुल द्रविण ने शॉ को शानदार खिलाड़ी बनाने के लिए काफी टिप्स दिए और शॉ के लिए काफी मेहनत भी की है। वहीं पृथ्वी भी अपनी सफलता का श्रेय राहुल द्रविण को देते है।

फरवरी, साल 2017 सबसे कम उम्र के शानदार किक्रेटर शॉ ने इंडिया अंडर-19 की तरफ से अपना मैच खेला। इस दौरान उन्होनें अपनी शतकीय पारी से सबको चौंका दिया।

आपको बता दें कि पृथ्वी शॉ अपनी ने नवंबर 2017-18 के रणजी ट्राफी टूर्नामेंट में मुंबई की टीम की तरफ से शानदार पारी खेली और इस पारी में शॉ ने लगातार दो शतक ठोंके।

पृथ्वी शॉ की प्रतिभा को देखते हुए 3 दिसंबर 2017 को भारतीय क्रिकेट प्रबंधन ने अंडर-19 टीम के कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी। आपको बता दें कि करिश्माई क्रिकेटर भारत की अंडर-19 टीम की भी अगुवाई कर रहे हैं। इन्होनें अपनी कप्तानी की जिम्मेदारी भी कमाल से निभाई । पृथ्वी शॉ ने अंडर-19 किक्रेट में अपनी कप्तानी के दौरान तीन मैचों में जीत दर्ज करवाई।

शॉ की अंडर-19 की कप्तानी के दौरान, भारत का पहला ग्रुप मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुआ, जिसमें पृथ्वी शॉ ने 94 रन की शानदार पारी खेली। इस मैच में टीम इंडिया 7 विकेट खोकर 328 रन बनाने में कामयाब रही। वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया की टीम महज 228 रन बनाकर आउट हो गई। इस तरह टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 100 रनों से जीत हासिल की।

भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से पापुआ न्यूगिनी के खिलाफ खेले गए मैच में पृथ्वी शॉ के 36 गेंदों में नाबाद 57 रन बनाए जिसकी बदौलत एकतरफा अंदाज में 10 विकेट से मैच अपने नाम कर लिया।

पृथ्वी शॉ की कप्तानी के दौरान जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में एक बार फिर भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार प्रदर्शन किया और स्पिनर अनुकूल रॉय के 20 गेंदों पर 4 विकेट की बदौलत जिंम्बाम्बे की टीम महज 154 रन बना सकी। वहीं टीम इंडिया ने नई ओपनिंग जोड़ी शुभमन गिल के 59 गेंदों पर 90 रन और हार्विक देसाई के 73 गेंदों पर 56 रनों की बदौलत बिना कोई विकेट खोए यह मैच जीत लिया।

इसी के साथ पृथ्वी की कमाल की कप्तानी के दौरान टीम इंडिया ने अपने तीनों ग्रुप मैच में जीत हासिल की। इसी के साथ टीम इंडिया ने टूर्नामेंट के अगले दौर क्वार्टरफाइनल में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया।

क्वार्टर फाइनल में भारत का मुकाबला बांग्लादेश से हुआ। पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने  265 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया। जबकि इसके खिलाफ बांग्लादेश की टीम महज 134 रन बनाकर ही आउट हो गई। इसी के साथ टीम इंडिया 131 रन की प्रभावशाली जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंचने में कामयाब रही।

पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने शुभमन गिल के नाबाद 102 रन की बदौलत 9 विकेट खोकर 272 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया वहीं इसके खिलाफ मैच खेल रही पाकिस्तान की टीम महज 69 रन ही बना पाई इसी के साथ 203 रनों के भारी अंतर से जीतकर टीम इंडिया ने टूर्नामेंट के फाइनल में मैच खेला।

आपको बता दें कि  इस टूर्नामेंट में भारतीय क्रिकेट टीम के राइजिंग स्टार पृथ्वी शॉ ने कप्तान के अलावा एक कुशल बल्लेबाज के तौर पर भी शानदार प्रदर्शन किया है। टूर्नामेंट की चार पारियों में 98.72 की स्ट्राइक रेट से 232 रन बनाए।

3 फरवरी 2018 को हुए फाइनल मैच में आस्ट्रेलियाई टीम महज 216 रन ही बना सकी। जबकि इसके खिलाफ मैच रही भारतीय टीम के मनजोत कालरा ने अपनी शतकीय पारी के साथ 101 रन बनाए वहीं हार्विक देसाई के 47 रनों की बदौलत टीम इंडिया ने 38.5 ओवरों में सिर्फ 2 विकेट खोकर जीत हासिल कर ली।

हालांकि इस मैच में पृथ्वी शॉ ने 41 गेंदों पर सिर्फ 29 रन ही बनाए थे। वहीं इस मैच में शॉ की सूझबूझ भरी कप्तानी को जमकर सराहा गया और ये मैच भारतीय क्रिक्रेट टीम के शानदार  प्रदर्शन और पृथ्वी की कप्तानी के लिए यादगार रहा। इसके साथ ही टीम इंडिय चौथी बार अंडर 19 क्रिकेट वर्ल्ड कप अपने नाम करने में कामयाब हुई।

अंडर 19 विश्व कप में में पृथ्वी शॉ के शानदार प्रदर्शन से  मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन काफी प्रभावित हुआ। इसी के चलते मुंबई क्रिक्रेट एसोसिएशन ने 5 फरवरी 2018 से शुरू होने वाली विजय हजारे ट्रॉफी के लिए शॉ के नाम को भी शामिल किया आपको बता दें कि इस ट्रॉफी के कुल 16 सदस्य चुने गए थे जिनमें से पृथ्वी शॉ एक थे।

अपनी आक्रामक शैली के कारण अंडर-19 वर्ल्डकप की कमान संभालने वाले पृथ्वी शॉ  को 2018 में इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी में दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम ने 1.2 करोड़ रुपए में खरीदा।

पृथ्वी शॉ  ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में शानदार शतक लगाकर जमकर सुर्खियां बटोरी। वहीं इनका ऐसा कारनामा देख कर क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों ने भी भी पृथ्वी की प्रतिभा की जमकर तारीफ की है।

पृथ्वी शॉ 5वें ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने सबसे कम उम्र में ओपनिंग करते हुए अर्धशतक जड़ा है. 18 साल 329 दिन के पृथ्वीने राजकोट में शानदार अर्धशतक जड़ा।

सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो पृथ्वी शॉ यहां भी तीसरे नंबर पर खड़े हैं। पृथ्वी पहला अर्धशतक जड़ने वाले तीसरे सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी बन चुके हैं। सचिन तेंदुलकर नंबर वन पर हैं।

पृथ्वी शॉ ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 56 गेंदों पर अर्धशतक जड़ा. ऐसा करने वाले वो चौथे भारतीय खिलाड़ी हैं.

शॉ जितने आक्रामक हैं उतनी ही तकनीकी रूप से सक्षम और धैर्य के साथ खेलने वाले भी क्रिकेटर भी हैं, उन्होनें अपनी बल्लेबाजी से सबसे दिलों में अपने लिए जगह बना ली है। पृथ्वी शॉ ने लगातार संघर्ष करते हुए डेब्यू टेस्ट तक का सफर तय किया है। हमें उम्मीद है कि ये युवा खिलाड़ी आने वाले समय में आसमान की ऊंचाइयों को छूएगा उनके बेहतर भविष्य के लिए उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं।




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