Wednesday, 14 August 2019

अनुच्छेद 370 हटने के बाद से बीते नौ दिन में पाकिस्तान ने उठाए ये कदम, भटक रहा है दर-दर


जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद से ही पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ती ही जा रही है। पाक में खलबली का आलम यह है कि उसने कोई ऐसा दरवाजा अंतरराष्ट्रीय पटल पर नहीं छोड़ा है, जहां उसने अनुच्छेद 370 और कश्मीर के मुद्दे को लेकर गुहार न लगाई हो। चाहे वो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद हो या फिर अमेरिका, रूस, चीन या यूएई। मगर उसे हर तरफ से मुंह की खानी पड़ी है।
पाकिस्तान ने भारत से इस तनातनी के बीच मैत्री सेवाएं जैसे दिल्ली-लाहौर सद्भावना बस सेवा को निलंबित कर दिया है। वहीं 15 अगस्त को पाक काले दिवस के रूप में मनाने वाला है। संसद में अनुच्छेद 370 को हटाने का बिल पांच अगस्त को देश के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया था, जिसके बाद से नौ दिन बीत चुके हैं। मगर पाकिस्तान की तिलमिलाहट दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने के बाद पुलवामा जैसे हमले की आशंका प्रकट करते हुए कहा था कि इससे पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध छिड़ सकता है। संसद की असाधारण संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने आगाह किया, "यह ऐसा युद्ध होगा जिसे कोई नहीं जीतेगा और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।" जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करने के भारत सरकार के फैसले के एक दिन बाद कश्मीर की स्थिति पर चर्चा के लिए बैठक बुलायी गई थी। जम्मू कश्मीर भारत का अखंड हिस्सा है और इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी शामिल है।
कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के विरोध में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखा है। संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व ने कहा कि वे भारत और पाकिस्तान से विभिन्न स्तर पर संपर्क में है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कश्मीर मुद्दे पर तनाव के मद्देनजर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। महासचिव के प्रवक्ता स्टीफेन दुजार्रिक ने बुधवार को कहा, 'हमें मुद्दे की पूरी जानकारी है और हम चिंता के साथ स्थिति पर नजर रख रहे हैं। विभिन्न स्तरों पर संपर्क किए जा रहे हैं। हम सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं।
यूएनएससी ने पाकिस्तान के अनुरोध को खारिज करते हुए उसे शिमला समझौता की याद दिलाई। जिसके तहत कश्मीर मसला भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है और इसमें तीसरा पक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। पाकिस्तान को अमेरिका से भी राहत नहीं मिली। यहां विदेश विभाग के प्रवक्ता मे कहा कि कश्मीर पर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं है जो प्रत्यक्ष तौर पर द्विपक्षीय वार्ता के लिए कहता है। अंत में चीन ने पाकिस्तान का समर्थन करने से मना कर दिया और कहा कि वह भारत और पाकिस्तान को मैत्रीपूर्ण पड़ोसी मानता है और चाहता है कि वह कश्मीर मसले को यूएन के प्रस्ताव और शिमला समझौते के तहत सुलझाए। 


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