Sunday, 25 August 2019

इस जड़ में है इतनी शक्ति कि इसे सिर्फ मुंह में रख लेने से ही कई रोगो का हो जाता हैं सर्वनाश


मुलेठी एक गुणकारी जड़ी बूटी है। ये स्वाद में मधुर, शीतल, पचने में भारी, स्निग्ध और शरीर को बल देनेवाली होती है। अगर हम सभी लोगों में कई लोगों ने मुलेठी खाया होगा और नहीं भी खाया होगा तो आपको बता दें कि आप इसे खाना शुरू कर दें इससे आपको कई सारे लाभ होंगे। आपको बता दें कि मुलहठी खांसी, जुकाम, उल्टी व पित्त को बंद कर देता है। मुलेठी अम्लता में कमी व जख्मों में लाभकारी है। मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा के गुणों से भरपूर होती है। इसका इस्तेमाल आंखों के रोग, मुंह के रोग, गले के रोग, दमा, दिल के रोग, घाव के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है। आइये जानते है इसके फायदे ...

-गले की खराश, गला बैठना: आपको बता दें मुलेठी के मात्र चबाने से ही आपकी ये समस्‍या समाप्‍त हो जाएगी और यह आपकी आवाज को भी मधुर भी बनाता है।

अगर आपके सीने में जलन हैं और खाना भी सही तरीके से नहीं पच रहा है तो मुलेठी को मुंह में रखकर चूसना होगा इससे आपको सीने की जलन और खाना ना पचने की समस्या में राहत मिलेगी।

-यह स्वाद में मधुर होने के कारण प्रायः सभी बच्चे बिना झिझक के इसे चाट लेते है।

-मुलेठी बुद्धि को भी तेज करती है। अतः छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग नियमित रूप से कर सकते हैं।

-यह हल्की रेचक होती है. अतः पाचन के विकारों में इसके चूर्ण को इस्तेमाल किया जाता है। विशेषतः छोटे बच्चों को जब कब्ज होती हैं, तब हल्के रेच के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है।

-छोटे शिशु कई बार शाम को रोते हैं. पेट में गैस के कारण उन्हें शाम के वक्त पेट में दर्द होता है, उस समय मुलहठी को पत्थर पर घिसकर पानी या दूध के साथ पिलाने से पेटदर्द शांत हो जाता है।

-खांसी, जुकाम में कफ को कम करने के लिए मुलहठी का ज्यादातर उपयोग किया जाता है।

-बढ़े हुए कफ से गला, नाक, छाती में जलन हो जाने जैसी अनुभूति होती है, तब मुलहठी को शहद में मिलाकर चटाने से बहुत फायदा होता है

-बड़ों के लिए मुलहठी के चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं। शिशुओं के लिए मुलहठी के जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर शहद या दूध में मिलाकर दिया जा सकता है।



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