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Wednesday, 17 April 2019

नॉट्र डाम कैथेड्रल: चर्च में आग लगने से पेरिस सहित पूरी दुनिया दुखी, जानिए क्यों है ये खास




पेरिस के सबसे पुराने और दुनियाभर में मशहूर नॉट्र डाम कैथेड्रल में सोमवार को भीषण आग लग गई थी। जिससे कैथोलिक चर्च के शिखर और छत ढह गए हैं। चर्च में आग लगने से ना केवल पेरिस बल्कि पूरी दुनिया दुखी है। पेरिस में यही एक इमारत ऐसी थी जो एफिल टावर को टक्कर दे सकती है। दुनियाभर से लाखों लोग इसे देखने आते थे। चलिए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या खास था यहां-

इस चर्च में 13 वीं सदी की बनी तीन गुलाब की आकृति वाली खिड़कियां हैं। ये खिड़कियां यहां की सबसे बड़ी खासियत हैं। इनमें पहली और सबसे छोटी खिड़की मुख्य द्वार के सामने है। इसे साल 1225 के आसपास बनाया गया था। इन्हें पत्थरों के साथ कांच को जोड़कर बनाया गया है। वहीं दक्षिण की ओर लगी खिड़की का व्यास 43 फुट है, जिसमें 84 पैनल लगे हुए हैं। चर्च के प्रवक्ता का कहना है कि हो सकता है कि आग से इन खिड़कियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

नॉट्र डाम कैथेड्रल में लोग यहां मौजूद दो खूबसूरत टावरों को देखने आते हैं। जो चर्च के पश्चिमी हिस्से के सामने हैं। इस हिस्से का काम 1200 ईस्वी में शुरू हुआ था। लेकिन उत्तर में स्थित एक अन्य टावर इसके बाद बना। इसका काम 1250 में पूरा हुआ। इन दोनों टावरों की ऊंचाई 68 मीटर है। बताया जाता है कि इनकी 387 सीढ़ियों को चढ़ने के बाद पेरिस का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि ये दोनों टावर सुरक्षित हैं।

पेरिस का नजारा देखने के लिए जो भी इन सीढ़ियों को चढ़ने में खुद को सक्षम समझता है, उसे 'गारगोयल', से होकर गुजरना पड़ता है। ये एक मिथकीय किरदार की मूर्ति है, जो कई जानवरों की आकृति को मिलाकर बनाई गई है। गारगोयल को चर्च के शीर्ष पर लगाया गया है। उसे देखकर ऐसा लगता है कि वह पूरे शहर को देख रहा हो।

इस चर्च की सबसे खास चीजों में से एक हैं यहां लगी घंटियां। इस चर्च में 10 घंटियां लगी हैं। इनमें सबसे बड़ी घंटी का वजन 23 टन है। ये घंटी 1685 में बनकर तैयार हुई थी। इसे इमैनुअल के नाम से जाना जाता है। साल 2013 में इस चर्च ने अपने 850 साल पूरे किए हैं। इस मौके पर यहां लगी घंटियों की मरम्मत की गई। यहां मूल घंटियों की हूबहू आकृति का अहसास दिलाने के लिए हर घंटी का नाम एक संत के नाम पर रखा गया है। यहां की इन मूल घंटियों को फ्रांस की क्रांति के दौरान तोप के गोले बनाने के लिए पिघला दिया गया था।

12वीं सदी में बनी नॉट्र डाम की सबसे ऊंची मिनार आग की चपेट में आने से गिर गई। इस इमारत के इतिहास से पता चलता है कि इसमें कई बदलाव किए गए थे। फ्रांस की क्रांति के समय इसे ध्वस्त कर दिया गया था। फिर 1860 के दशक में इसे दोबारा बनाया गया।

माना जाता है कि नॉट्र डाम ईसा मसीह से जुड़ी बेशकीमती निशानियों का गढ़ भी है। यहां मौजूद कांटों के एक ताज को लेकर कहा जाता है कि सूली पर चढ़ने से पहले ईसा मसीह ने उसे पहना था। खबर है कि उस ताज को आग से बचा लिया गया है। इस चर्च में लगी पेंटिंग्स काफी भारी थीं, जिन्हें निकालने में कर्मचारियों को काफी दिक्कत आई। यहां मौजूद कई पाइप ऐसे थे, जिन्हें मध्ययुग में बनाया गया था।

इस देश के लिए क्यों है खास?

वैसे तो फ्रांस की पहचान यहां के एफिल टावर से होती है, लेकिन फिर भी ये चर्च बेहद खास है। ऐसा इसलिए क्योंकि एफिल टावर एक सदी से थोड़ा ज्यादा पुराना है, लेकिन ये चर्च 850 साल से भी अधिक पुराना है।

एफिल टावर से पहले ये चर्च ही फ्रांस की पहचान हुआ करता था। ये चर्च 1871 की क्रांति और दो विश्व युद्धों का गवाह रह चुका है। यही वजह है कि चर्च के जलने से फ्रांस के लोग बेहद दुखी हैं। चर्च में आग लगने पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैकों ने कहा था कि पूरा देश जल रहा है।









सोने में लिपटी मिली 3 हजार साल पुरानी ममी, देखकर उड़ जाएगी रातों की नींदें


मिस्र की राजधानी कायरो से 165 मील के दूरी पर अल घोरिफा में एक कब्रिस्तान से ढाई हजार साल पुरानी ममी और कई पौराणिक वस्तुएं मिली हैं और इस खबर के सामने आने के बाद से हे हड़कंप मचा हुआ है. बताया जा रहा है कि पुरातत्वविदों ने इसके बारे में दावा किया है कि ये तीन हजार साल पुरानी है. बता दें कि अन्वेषण जॉस गेट्स और प्रसिद्ध पुरातत्वविद् जाहि हवास ने इस क्रबिस्तान की खोज का लाइव प्रसारण भी डिस्कवरी चैनल के माध्यम से किया है और इस प्रोग्राम का नाम 'एक्सपीडिशन अननोन:  इजिप्ट लाइव' था.

खास बात यह है कि 3 हजार साल पुरानी यह ममी सोने में लिपटी हुई पाई गई थी. बता दें कि इसके प्रसारण में एक पत्थर के ताबूत को खोलते हुए दिखाया है और इस ताबूत में सोने की पट्टियों में लिपटी ममी साफ दिख रही हैं. साथ ही इसे लेकर पुरातत्वविद् का मानना है कि यह ममी किसी उच्च कोटि के पुजारी की है और यह ममी ऊपर से लेकर नीचे तक सोने की पट्टियों से लिप्त है.

ताबूत में कई अन्य पौराणिक वस्तुएं भी मिली है और इसके साथ दो और ममी भी मिली हैं. बता दें कि यह ममी 2500 साल पुराने एक पारिवारिक मकबरे में पाई गई हैं।

Tuesday, 16 April 2019

रूस में बाज और उल्लू इसलिए करते हैं राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा, बेहद खास है वजह









आमतौर पर आपने देखा होगा कि किसी भी देश में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा का जिम्मा ट्रेंड कमांडो या आर्मी के जिम्मे होता है। राष्ट्रपति भवन या पीएम की सुरक्षा इतनी कड़ी होती है कि वहां पर परिंदा भी पर नहीं मर सकता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे देश के अबरे में बारे में बताने जा रहे हैं, जहां के राष्ट्रपति भवन की रक्षा खुद परिंदे करते हैं, जिसकी एक खास वजह है।

जी हां, यह देश है रूस। रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन और उसके नजदीक स्थित प्रमुख सरकारी भवनों की सुरक्षा के लिए देश के रक्षा विभाग ने पक्षियों को रखा हुआ है। इन पक्षियों में उल्लू और बाज शामिल हैं। बाज और उल्लुओं की एक खास टीम सुरक्षा का जिम्मा संभालती है।

देश के रक्षा विभाग ने राष्ट्रपति भवन की कड़ी सुरक्षा के लिए एक टीम तैयार की है। शिकारी परिंदों की यह टीम साल 1984 से राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा में डटी हुई है। बताया जा रहा है कि इस टीम में फिलहाल 10 से ज्यादा बाज और उल्लू हैं। इन बाजों और उल्लुओं को सुरक्षा के लिहाज से खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन शिकारी पक्षियों की इस खास टीम को 1984 में ही गठित कर दिया गया था। इस टीम को बनाने के पीछे कारण किसी दुश्मन की शातिर चालों को नाकाम करना नहीं बल्कि कौओं व अन्य पक्षियों के बीट व मूत्र और अन्य गंदगी से राष्ट्रपति भवन और वहां बनी सरकारी इमारतों को इस नुकसान और गंदगी से बचाना है। जिसके लिए बाजों और उल्लुओं को तैनात किया गया है। ये कौओं को देखते ही उन पर आक्रमण कर देते हैं और उन्हें दूर भगा देते हैं। से पक्षी संघीय गार्ड सेवा का हिस्सा भी हैं।। 

क्रेमलिन और उसके आसपास के भवनों की गंदगी फैलाने वाले पक्षियों से सुरक्षा में तैनात शिकारी परिंदों की टीम में 20 वर्षीय एक मादा बाज 'अल्फा' और उसका साथी 'फाइल्या' उल्लू है। इन दोनों को जैसे ही कोई कौआ राष्ट्रपति भवन के आसपास मंडराता नजर आ जाए या आवाज सुन लें तो ये बिना देरी किए हुए उन पर झपट पड़ते हैं और उन्हें दूर भगा देते हैं या मार गिराते हैं।

अपना हाथ मोबाइल की तरह चार्ज करती है ये लड़की, जानिए इसके बारे में...


आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताएंगे जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे। दरअसल, हम जिस लड़की की बात कर रहे है वो 28 साल की एंजेल गिफ्रिया जो अपना हाथ एक मोबाइल की तरह चार्ज करती है।

चौंकाने वाली बात तो ये है कि ये लड़की अपने हाथ को चार्ज किए बिना कुछ भी कार्य नहीं कर सकती है। मिली जानकारी के मुताबिक, लड़की के मां -बाप का बताना है कि इसके पैदा होने से ही एक हाथ नहीं था।

इस कारण जब ​वह मात्र 4 महीने की थी तभी चिकित्सकों की सलाह से हमने इसके एक इलेक्ट्रिक हाथ लगवा दिया। इसके संबंध में चिकित्सकों का बताना है कि हाथ जब तक चार्ज नही होगा तब तक वो अच्छे से कार्य भी नही कर पाएगा एवं लड़की को अपनी बढ़ती हुई आयु संग ही अपने इलेक्ट्रिक हाथ को भी अपग्रेड किए जाने की आवश्यकता पड़ती थी।

इस काम हेतु लड़की सवेरे उठते ​ही सर्वप्रथम अपना हाथ चार्ज करती है क्योंकि बिना चार्ज किए बगैर ये हाथ कार्य नहीं करता है। आपको बता दे कि इस हाथ को चार्ज होने में लगभग 1 घंटे का वक्त लगता है।

Monday, 15 April 2019

हर कोई है इस बच्ची की आँखों का दीवाना, लेकिन माँ...''


अमेरिका के मिन्नेसोटा में रहने वाली महज दो साल की एक बच्ची की आंखें इतनी खूबसूरत और प्यारी हैं कि बिना उसकी तारीफ किए कोई रह ही नही सकता है. जो भी इस बच्ची कई आँखों को देखता है वह इन्हे निहारे बिना रह ही नही पाता है. लेकिन उसकी आंखें खूबसूरत होने की वजह बेहद खराब भी है. बता दें कि बच्ची को एक दुर्लभ बीमारी है, जिसकी वजह से उसकी आंखों की पुतलियां काफी बड़ी हैं.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, आंखों के ज्यादातर हिस्से में पुतलियां ही नजर आती हैं और पैदा होने के हफ्तेभर बाद ही जांच के दौरान उसे एक गंभीर बीमारी होने की खबर सामने आई थी. बताया जाता है कि इस तरह की बीमारी 2 लाख बच्चों में से किसी एक को होती है, इसकी वजह से बच्चों की आँखों कई रोशनी जाने का खतरा भी बना रहता है.

बता दें कि यह मामला मिन्नेसोटा में रहने वाले मेरोन और करीना मार्टिनेज की करीब दो साल की बेटी मेहलानी का है, जो एक रेयर सिन्ड्रोम एक्सेनफेल्ड रीगर से इस समय जूझ रही है।