Showing posts with label News. Show all posts
Showing posts with label News. Show all posts

Monday, 16 September 2019

मुश्किल आसन करती दिखेंगी बकरियां, 500 लोगों के साथ करेंगी योगा


 दुनिया में एक से बढ़ कर एक अनोखी बातें होती रहती हैं। कई बातें तो ऐसी होती हैं, जो हैरतअंगेज होती है। अब इसी तरह की एक बात फ्लोरिडा में होने जा रही है। यहां के थोनोटसोसा स्थित ग्रैडी गोट फार्म में बकरियों का एक योगा सेशन होने वाला है। इसमें 110 बकरियों के साथ 500 लोग भी भाग लेंगे। कहा जा रहा है कि यह बकरियों का दुनिया में होने वाला सबसे बड़ा सेशन होगा।
हिल्सबॉरो कांउटी स्थित ग्रैडी गोट फार्म की मालकिन 56 साल की डेबी कैन्टन ने कहा कि वह अपने हसबैंड रॉब के साथ मिल कर इस इवेंट का आयोजन करने जा रही हैं। इसमें बकरियां योगा सेशन में भाग लेकर पहले के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ने का प्रयास करेंगी। यह योगा सेशन इसी महीने में आयोजित होगा।
इसके पहले फरवरी महीने में एरिजोना में बकरियों का योगा सेशन हुआ था, जिसमें 84 बकरियों के साथ 351 लोगों ने भागीदारी की थी। इसके बाद जून महीने में ब्रिटिश कोलम्बिया स्थित एबॉट्सफोर्ड के मान फाम में बकरियों का योगा सेशन हुआ. जिसमें 400 लोग शामिल हुए थे। कैन्टन ने कहा कि इस सेशन में हम वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ने जा रहे हैं।
कैन्टन ने यह भी कहा कि इस इवेंट के लिए रिजर्वेशन अब फुल हो चुका है। लेकिन अगर कुछ और पार्टिसिपेंट्स शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें अगले शनिवार को इसके लिए एक और मौका दिया जाएगा।
बकरियों के इस योगा इवेंट का मकसद सिर्फ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना ही नहीं है, बल्कि इसके जरिए फंड इकट्ठा करना है, जिसका इस्तेमाल ह्यूमन ट्रैफिकिंग और बच्चों के सेक्शुअल एक्सप्लाइटेशन को रोकने के लिए किया जा सके। उल्लेखनीय है कि कैन्टन ने अपने गोट फार्म के जरिए चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज के खिलाफ लगातार अभियान चलाया है। उन्होंने चैरिटी के लिए ग्रैडी गोट फाउंडेशन की स्थापना की है। यह फाउंडेशन ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने के मकसद से कई प्रोजेक्ट चलाता है।


लोगों में मचा हड़कंप जब देख लिया 3 फीट लंबा सफेद कोबरा


बारिश के कारण सभी जीव बाहर आ रहे हैं. ऐसे में सांप जैसे जीव कई जगह देखने को मिल रहे हैं जिसे देखकर आम आदमीं डर से भाग जाता है. बता दें, कोबरा किंग  को दुनिया भर के जहरीलें सांपों में से एक माना जाता है, लेकिन कोबरा प्रजाति के सांप सिर्फ काले रंग के ही नहीं होते हैं, बल्कि इसकी एक और प्रजाति पाई जाती है. इसका रंग सफ़ेद होता है जिसे आपने कभी नहीं देखा होगा. इसे काफी दुर्लभ बताया गया है. इसी का एक वीडियो सामने आया है  जिसे आप भो देखकर हैरान रह जांयेंगे.
बता दें, तमिलनाडु के एक रिहायशी इलाके में सफ़ेद रनग का कोबरा देखने को मिला है. तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईदरापालयम के एक रिहायशी इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गई जब वहां लोगों को सफेद कोबरा दिखाई दिया. इस इलाके में मिले सफेद कोबरा सांप की लंबाई 3 फुट बताई जा रही है. हालांकि इस कोबरा सांप को पकड़कर उसे सुरक्षित जंगल में वापस छोड़ दिया गया है. जानकारी के अनुसार, इस सांप को मदुक्करई जंगल में छोड़ा गया है.
इसी के बारे में बताया जाता है कि सफेद कोबरा सांप की लंबाई 10 इंच से होकर 6 से 7 फुट तक की हो सकती है. भारत में इस प्रजाति के सांप कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल के सुंदरवन नेशनल पार्क और असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में पाए जाते हैं. यानि कोबरा की ये प्रजाति बहुत कम देखने को मिलती है और जब ये देखने को मिला तो हैरान रह गए लोग.


नौकरी मांगने पहुंचे थे दिव्यांग, जिलाधिकारी ने दे दिया कभी ना भूलने वाला तोहफा


कहा जाता है कि यदि आप किसी की मदद करने की ठान लें तो फिर आप वह काम कर लेते हैं और ऐसा ही कुछ हुआ है तमिलनाडु के थूथुकुड्डी जिले में भी, जहां वहां के जिलाधिकारी द्वारा दिव्यांग लोगों के लिए जो मदद का हाथ बढ़ाया गया है, उसकी तारीफ हर कोई जोर-शोर के साथ कर रहा है. वहीं जिलाधिकारी के पास नौकरी की मांग करने आए दिव्यांगों के लिए उन्होंने कैफे ही खुलवा दिया और साथ ही इस कैफे में काम करने वाले लोगों को 45 दिन की मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी अलग से दिलवाई गई है.
एक वेबसाइट की रिपोर्ट की माने तो, इस कैफे में काम कर रहे 12 लोगों में से 11 लोग लोकोमोटर दिव्यांग हैं और इसका मतलब यह है कि वह चल-फिर नहीं सकते हैं. जबकि एक सदस्य सुन नहीं सकता है और इस कैफे का नाम 'कैफे एबल' है, जिसकी प्रतिदिन कमाई करीब दस हजार रुपये होती है. वहीं इस कैफे में हेड शेफ से लेकर जूस मास्टर, टी मास्टर, बिलिंग क्लर्क और सफाईकर्मी सहित सभी दिव्यांग ही हैं.
जिलाधिकारी संदीप नंदूरी ने बताया है कि मुझे अक्सर अलग-अलग दिव्यांगजनों से नौकरियों के लिए याचिकाएं मिलती थीं, हालांकि हर किसी को नौकरी देना संभव नहीं था और इस कारण कैफे खोल दिया गया. जानकारी की माने तो इस बेहतर कदम की शुरुआत जिलाधिकारी संदीप द्वारा एक स्वयं सहायता समूह के गठन से की गई है और इस स्वयं सहायता समूह में उन सभी दिव्यांगों को शामिल किया है, जिन्होंने जिलाधिकारी से नौकरी का अनुरोध किया था. वहीं राजापलायम में ऑस्कर होटल मैनेजमेंट कॉलेज से बात की गई और फिर इन दिव्यांगजनों को 45 दिन के लिए होटल मैनेजमेंट ट्रेनिंग कोर्स में दाखिला दिया गया. वहीं इसके बाद तीन निजी कंपनियों के सीएसआर फंड और जिला प्रशासन द्वारा धन जुटाकर कलेक्ट्रेट परिसर में ही कैफे की शुरुआत कर दी गई.



दुनिया का सबसे खतरनाक पुल, जिसकी तस्वीरें ही पैदा कर देगी आपमें डर


आज के समय में दुनिया में एक से बढ़कर एक मौजूद पुल हैं, जिनमें कि कुछ बेहद ही खूबसूरत तो कुछ बेहद ही खतरनाक भी नजर आते हैं और एक ऐसा पुल चीन के हुनान प्रांत में है, जहां जाना तो दूर की बात, लोग पुल की तस्वीरें देखकर ही डर से भर जाते हैं.
आपको जानकारी के लिए बता दें कि यह पुल 100 मीटर लंबा है और पांच फीट चौड़ा यह बना हुआ है, जो 1500 मीटर की ऊंचाई पर 'तीयानमैन माउंटेन' पर स्थित है. खास बात यह है कि यह दुनिया का सबसे खतरनाक स्काईवॉक है, जिसे कि साल 2016 में लोगों के लिए खोला गया था. बता दें कि इस पुल का नाम 'कॉइलिंग ड्रैगन क्लिफ' है और इसे अगर 'मौत का पुल' कहें तो भी कुछ गलत नहीं होगा, ऐसा इसलिए क्योंकि यहां थोड़ी सी भी चूक और मौत का सामना तय है.
दुनिया के डरावने पुलों में भी यह शुमार है. हालांकि डर के साथ ही इसकी और इसकी आस-पास की खूबसूरती सबका मन मोह लेती है. सांसे थाम देने वाले इस पुल पर जाने की हिम्मत हर कोई नहीं कर पाता है, हालांकि जो जाते हैं वो रोमांचित हुए बिना नहीं रहते हैं. 



'वीरू सहस्त्र बुद्धि' की तरह ही दोनों हाथ से लिख सकती है ये बच्ची


देश के हर कोने में प्रतिभा छिपी हुई है, कहीं ना कहीं आपको ये प्रतिभा देखने को मिल ही जाती है. बस तलाशने की जरूरत है. कईबार ऐसे लोग सामने आते हैं जिनमें इतनी खूबियां होती हैं कि आप जानकर हैरान रह जाते हैं. ऐसे ही एक 13 साल की बच्ची भी सोशल मीडिया पर छाई हुई है. बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म 3 इडियट्स से प्रेरित रायपुर की 13 वर्षीय काव्या चावड़ा दोनों हाथों से परफेक्ट मिरर राइटिंग करती हैं. आपने फिल्म में देखा ही होगा कि किस तरह से एक्टर बोमन ईरानी दोनों  हाथों से लिखते हैं. वैसा ही ये लड़की भी कर सकती है.
बता दें, अपने इस टैलेंट के बारे में एएनआई से बात करते हुए काव्या ने बताया कि, 'इसमें बहुत अधिक एकाग्रता लगती है, मिरर राइटिंग के लिए मैं पिछले तीन से चार वर्षों से प्रैक्टिस कर रही हूं. उन्होंने कहा मैं लिखते हुए भी मिरर राइटिंग करती हूं. काव्या ने ये भी बताया कि इसकी प्रेरणा मुझे 3 इडियट्स फिल्म से मिली, फिल्म में वायरस दो हाथों से लिखते हुए दिखाए गए हैं. उसी के देखा देखि ये भी ऐसा करने लगी. बता दें, कक्षा 7वीं में पढ़ने वाली काव्या का कहना है कि वो हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में एक ही तरह की मिरर राइटिंग कर सकती हैं.
जहाँ 7वीं के बच्चे एक हाथ से ही लिख पाते हैं वहीं ये बाछिन दोनों हाथों से लिख लेती है. काव्या ने बताया कि पहले उसने इंग्लिश में लिखना सीखा उसके बाद मैंने हिंदी में भी लिखना शुरू किया. आगे काव्या ने कहा कि,' मैं सबको ये सन्देश देना चाहती हूं कि आज के दौर में लोग अंग्रेजी सिखने के पीछे भाग रहे हैं, जबकि हमें अपनी भाषा हिंदी को बढ़ावा देना चाहिए. काव्या ने आगे कहा कि वह हर दिन अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मिरर राइटिंग की प्रैक्टिस करती थी. इस बीच काव्या की मां, नेहा चावड़ा ने कहा, "मैं उसे पढ़ाई के बाद आराम करने के लिए कहती थी लेकिन, वो मानती नहीं थी और प्रैक्टिस में लगी रहती थी. सिर्फ 6 महीने में ही हमें उसकी प्रतिभा के बारे में पता चल गया, वह हिंदी को बढ़ावा देना चाहती है."
वहीं बेटी के इस काम पर उसके माता पिता को बह गर्व है. काव्या के पिता, प्रितेश चावड़ा ने कहा कि, "हमें गर्व है कि मेरी बेटी के पास ऐसी अनोखी प्रतिभा है. मैं उनकी बातों का समर्थन करता हूं."