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Friday, 12 July 2019

समुद्र में दफ़न हो गए ये शहर, खोज से दुनिया रह गई स्तब्ध



हजारों, सैकड़ों साल पहले दुनिया में ऐसे-ऐसे शहर हुआ करते थे, जो आज इतिहास बन गए हैं और वो इसलिए क्योंकि वो समुद्र की गहराइयों में विलीन हो गए थे. आज हम आपको कुछ ऐसे ही शहरों से रुबरू करा रहे हैं, जो कि रहस्यमयी तो हैं ही, साथ ही वे समुद्र की अनंत गहराइयों में भी डूब गए थे.

यह है सिकंदर का शहर अलेक्जेंड्रिया, जो लगभग 1500 साल पहले भयानक भूकंप के कारण समुद्र में अंदर तक डूब गया था और पानी में इसके खंडहर आज भी देखने को मिलते हैं, जो इस शहर की विरासत को बयां भी करते हैं.

अगला है खंभात का खोया हुआ शहर, जो कि 17 साल पहले खंभात की खाड़ी में मिला था और बताया जाता है कि यह शहर करीब 9500 साल पहले हे समुद्र में डूब गया था. साल 2002 में विशेषज्ञों ने इसे खोज निकाला था. लेकिन यह अभी भी रहस्य ही है कि यह आखिर कैसे डूबा था।

बीच सड़क पर आराम फर्मा रहे थे शेर, गाड़ियों का लगा जाम और...


सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियों में खाली सड़क पर एक के बाद एक गाड़ियां आती गईं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई की अपनी गाड़ी का हॉर्न बजा दे. आइये आपको भी बता देते हैं ये वीडियो.

दरअसल यह सब हुआ साउथ अफ्रीका के सबसे बड़े अभ्यारण्य क्रूगर नेशनल पार्क में. यहां की एक सड़क पर शेरों का एक झुंड आराम फरमा रहा था. इतने में ही सामने से एक कार आती है और दूर ही खड़ी हो जाती है. ऐसे में किसी भी हिम्मत नहीं होती कि उन्हें उठा सके और हॉर्न बजा सके. कुछ देर रुकने के बाद धीरे धीरे यह कार आगे बढ़ने की कोशिश करती है इतने में ही जंगल की तरफ से सड़क एक और शेर निकल कर इस कार के ठीक सामने आकर बैठ जाता. ये नज़ारा किसी को भी डरा दें. द जंगल एशिया नाम के फेसबुक पेज से शेयर किया गया यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

वीडियो जैसे जैसे आगे बढ़ता है सड़क पर गाड़ियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जाता है लेकिन कोई भी इन शेरों के आराम में खलल नहीं डालता, सभी दूर खड़े बस जंगल के इस राजा को निहारते रहते हैं.

शुक्रवार, 12 जुलाई: जानिए आज के पेट्रोल-डीजल के भाव


आज यानि 12 जुलाई को दिल्ली में पेट्रोल का दाम आज 70 रुपये प्रति लीटर है। डीजल 64 रुपये में बिक रहा है।सभी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर कीमतें समान हैं।

पेट्रोल।

जयपुर में एक लीटर पेट्रोल 72 रुपये प्रति लीटर।

मुंबई में एक लीटर पेट्रोल 77 रुपये प्रति लीटर।

कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल 73 रुपये प्रति लीटर।

चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल 74 रुपये प्रति लीटर।

डीजल।

जयपुर में एक लीटर डीजल 69 रुपये प्रति लीटर।

मुंबई में एक लीटर डीजल 69 रुपये प्रति लीटर।

कोलकाता में एक लीटर डीजल 68 रुपये प्रति लीटर।

चेन्नई में एक लीटर डीजल 70 रुपये प्रति लीटर है।

भारत का सबसे अनोखा गांव, इसका मुखिया खाता भारत में और सोता म्यांमार में...


आज हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिसका मालिक कहता भारत का है, लेकिन वह सोने के लिए म्यांमार जाता है. गांव का नाम लोंगवा है , जिसका आधा हिस्सा भारत में और आधा म्यांमार में है. इस गांव की एक खास बात यह भी है कि सदियों से यहां रहने वाले लोगों के बीच दुश्मन का सिर काटने की परंपरा चल रही थी, जिस पर 1940 में प्रतिबंध लगाया गया था.

लोंगवा नागालैंड के मोन जिले में घने जंगलों के बीच म्यांमार सीमा से सटा हुआ भारत का आखिरी गांव है और यहां कोंयाक आदिवासी रहते हैं और इन्हें बेहद ही खूंखार भी माना जाता है. वहीं अपने कबीले की सत्ता और जमीन पर कब्जे के लिए वे अक्सर पड़ोस के गांवों से लड़ाईयां लड़ते हैं. जानकारी के माने तो साल 1940 से पहले कोंयाक आदिवासी अपने कबीले और उसकी जमीन पर कब्जे के लिए अन्य लोगों के सिर काट देते थे. वहीं कोयांक आदिवासियों को हेड हंटर्स भी कहा जाता है और इन आदिवासियों के ज्यादातर गांव पहाड़ी की चोटी पर ही होते थे, ताकि वे दुश्मनों पर आसानी से नजर रख सकें. लेकिन 1940 में ही हेड हंटिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था साथ ही माना जाता है कि 1969 के बाद हेड हंटिंग की घटना इन आदिवासियों के गांव में नहीं हुई है।



अगर पी लिया इस झील का जल, तो नहीं देख पाओगे आने वाला कल


आपने आज तक कई झीलों के बारे में सुना होगा. ऐसे में आज हम आपको एक अनोखी झील की जानकारी देने जा रहे हैं.एक झील दक्षिण अफ्रीका के लिंपोपो प्रांत में है, जिसे फुन्दूजी झील के नाम से जाना जाता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, प्राचीन समय में यहां से गुजर रहे एक कोढ़ी को यहां रहने वाले लोगों द्वारा खाना खिलाने और आश्रय देने से मना कर दिया गया था, जिसके बाद वह उन लोगों को श्राप देकर उस झील में घुस गया और फिर वह गायब हो गया था.

कहा जाता है कि झील के अंदर से सुबह-सुबह ड्रम बजाने की आवाजें, जानवरों और लोगों की चीखें सुनाई देती हैं और स्थानीय लोग यह भी कहते हैं कि इस झील की रक्षा पहाड़ों पर रहने वाला एक विशाल अजगर करता है, जिसे कि प्रसन्न करने के लिए हर साल वेंदा आदिवासी एक नृत्य उत्सव का आयोजन भी करते हैं, जिसमें कुंवारी लड़कियां नृत्य करती हैं. साथ ही बताया जाता है कि इस झील का निर्माण प्राचीन समय में भूस्खलन के कारण मुटाली नदी का बहाव रुक जाने से हुआ था और अब यह रहस्य बना है कि इस नदी का पानी तो बिल्कुल साफ ही है, फिर इसमें ऐसा क्या है जिसे पीते ही लोगों की मौत हो जाती है।