Thursday, 8 November 2018

जब सरेआम दीपिका ने जोड़े थे हाथ पर नहीं माना वो लड़का, करना पड़ा ये काम


दीपिका के लिए यह एक कभी न भूलने वाला पल बन गया।

स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान एक अनजान लड़का अपनी इच्छा पूरी करने के लिए सुरक्षा घेरा तोड़कर दीपिका पादुकोण के पास पहुंच गया। सुरक्षा-गार्डों ने लड़के को पकड़ने की कोशिश की परंतु उस लड़के ने सबको इधर-उधर करके दीपिका के पास दोबारा पहुँच गया। हालांकि दीपिका को उस लड़के की इच्छा पूरी करने में कोई भी दिलचस्पी नहीं थीं।

यहां तक कि दीपिका ने उस लड़के सामने हाथ भी जोड़े लेकिन वह लड़का नहीं माना और अंत में उसने अपनी जिद पूरी कर ली| लड़के की इच्छा थी कि वह दीपिका पादुकोण के साथ एक क्लोज सेल्फी ले। दीपिका को उस लड़के के साथ सेल्फी लेने में कोई दिलचस्पी नहीं थीं परन्तु उस लड़के की जिद के आगे अंत में दीपिका पादुकोण को झुकना ही पड़ा।

केवल पांच दिन खा लें यह पत्ता..जिंदगी में कभी नहीं आएगा हार्ट अटैक..दूर रहेंगी दिल की बीमारियां


करी पत्ता भारतीय खान-पान का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसे इसकी सुगंध के लिए जाना जाता है। भोजन में इस्तेमाल के अलावा इन पत्तों का प्रयोग हर्बल मेडिसिन में भी किया जाता है। डॉटीशियन रश्मि श्रीवास्तव बताती है कि करी पत्ता विटामिन (ए, बी, सी), कैल्शियम, प्रोटीन, एमिनो एसिड, फॉस्फोरस, फाइबर और आयरन का समृद्ध स्रोत होता है। हालांकि करी पत्ते के स्वास्थ्य लाभ इसमें मौजूद एल्कोलोइड के कारण होते हैं।

अपने महत्त्वपूर्ण गुणों के अलावा कई तरह के रोगों के इलाज के लिए भी करी पत्तों का प्रयोग किया जाता है। आप गीले या सूखे रूप में इन पत्तों का उपयोग कर सकते हैं। मार्केट में करी पत्तों का एसेंशियल ऑयल भी उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है। यदि डायबिटीज की समस्या है और आप ब्लड शुगर के स्तर को नेचुरल तरीके से नियंत्रण में रखना चाहते हैं तो अपने आहार में करी पत्ते को शामिल करें। इसके अलावा करी पत्ता कार्बोहाइड्रेट और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है और तनाव को भी कम करने में मदद करता है। एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण यह आपको त्वचा के संक्रमण से भी बचाने का काम करता है।

यदि आप वजन घटाना चाहते हैं तो आहार में करी पत्ते को शामिल करें। ये पत्ते शरीर को अंदरूनी रूप से साफ करने में मदद करते हैं और हानिकारक विषैले पदार्थों को हटाने का काम करते हैं। ये पत्ते शरीर में आवांछित वसा और कार्बोहाइड्रेट को भी जलाते हैं, जिससे वजन कम होता है।

23 साल के लडके ने रचा ली 91 साल की बूढी से शादी, बिस्तर पर जब प्यार चढ़ा परवान तो हो गया ये हादसा



जब से सोशल मिडिया का उदय हुआ हैं कही ना कही से कोई ना कोई खबर ऐसी आती ही रहती हैं जिसको जानकर हर कोई हैरान रह जाता है। ऐसा नही हैं की ये खबर सिर्फ फिल्म जगत या राजनैतिक क्षेत्र से आती हैं बल्कि आम आदमियो के बीच से निकली कई खबरों के बारे में जानकर पूरी दुनिया में मानो खलबली मच जाती हैं ।अब इस खबर को ही ले लीजिये जो हम आपके लिए लाये हैं।


जानकारी के मुताबिक एक ऐसी शादी हुई हैं जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान हैं। अब आपके दिमाग में आ सकता हैं की शादी तो सबकी होती हैं इसमें हैरानी वाली क्या बात हैं ? लेकिन जब हम आपको बतायेगे की इस शादी में दुल्हे की उम्र जहाँ 21 साल हैं वही दुल्हन 91 साल की हैं तो आप भी सोच में जरुर पड़ जायेगे । इसमें हैरान कर देने वाली बात ये भी हैं ये शादी कुछ शर्तो पर हुई हैं ।



अर्जेंटीना से आई इस खबर के बारे में जानकर हर किसी के होश उड़े हुए हैं । दरअसल अर्जेंटीना में एक 21 साल का लड़का लॉ की पढाई कर रहा था । लडके की आर्थिक स्थिति ठीक नही थी लेकिन वह फिर भी जी जान से लगा हुआ था, उसके घर में उसकी माँ और भाई रहते थे साथ में एक 91 साल की वृधा भी रहती थी ।


इस 91 साल की महिला ने लडके को कहा की यदि वह उससे शादी कर लेगा तो महिला उसकी पढ़ाई के लिए सारा खर्च देगी । लड़का इस बात को झट से मान गया और 91 साल की वृधा के साथ शादी करने के लिए तैयार हो गया । ऐसा करने के पीछे 91 साल की वृधा ने बताया की उसको पेंशन मिलती हैं और जब उसकी मृत्यु हो जाएगी तो ये पेंशन इस लडके को मिलनी शुरू हो जाएगी क्योकि अब वो उसका पति बन चूका हैं ।


लेकिन कहानी में उस वक्त मोड़ आया जब 91 साल की वृधा हनीमून मनाने के लिए अपने 23 साल के पति के साथ गयी और बिस्तर पर ही महिला का दम निकल गया, जब लडके ने पेंशन के लिए आवेदन किया तो अधिकारी उस पर बरस पड़े और यह इल्जाम लगाया की लडके ने महिला की सम्पत्ति के लिए उससे विवाह किया था।

बैंक के लॉकर में रखे हुए थे लाखों रुपए, जब 5 साल बाद उसे खोला तो हो गई ऐसे


हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के थुरल बाजार में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखा है। इस शाखा के लॉकर

में रखे गए लाखों रुपये दीमक चट कर गई, जबकि गहनों का रंग भी खराब हो गया। इस बात का पता तब चला जब बैंक ग्राहक ने अपने पैसे निकालने के लिए लॉकर खोला।

हालांकि बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि लॉकर में पानी और दीमक कैसे आई, इसकी जानकारी नहीं है।

ग्राहक सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने करीब पांच साल पहले बैंक शाखा में लॉकर लिया था। उसमें उन्होंने डेढ़ लाख रुपये और सोने के गहने रखे थे। जून 2018 को उन्होंने लॉकर खोलकर उसमें से कुछ पैसे निकाले थे, तब लॉकर में सब कुछ ठीक था।

उन्होंने बताया कि अब उनके घर में एक धार्मिक समारोह है। तो उनको पैसों की ज़रूरत आन पड़ी। लेकिन वो चिंतित नहीं थे क्योंकि पैसा तो बैंक में सुरक्षित है।

लिहाजा शनिवार को वह बैंक शाखा में पैसे लेने गए। उन्होंने बैंक में अपने लॉकर को खोलकर देखा, तो उनकी आंखे फटी की फटी रह गयीं। उन्होंने देखा कि अंदर रखे हजारों रुपये मिट्टी का ढेर बन चुके हैं। गहने भी पानी से खराब हो गए हैं। उपभोक्ता ने बताया कि लॉकर में मिट्टी और पानी है।

अब उन्होंने इसकी शिकायत बैंक शाखा अधिकारी से की है। जब इस बारे में बैंक शाखा के अधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया कि लॉकर में कोई भी खराबी नहीं है। बैंक के सभी लॉकर सुरक्षित हैं।

सुशील कुमार के लॉकर में रखे पैसों को कैसे दीमक लगी और पानी कहां से आया, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। किसी को कुछ पता नहीं है कि ये कैसे हो गया। वहीं एक अधिकारी ने यह भी बताया कि नियम के हिसाब से लॉकर में नकद धनराशि नहीं रखी जा सकती।

जानिये क्या है मछली खाने के कुछ फायदे



सैमन, ट्राउट व सार्डाइन जैसी मछलियों को पौष्टिक आहार में शामिल करने से बच्चों में अस्थमा के लक्षण में कमी आ सकती है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया में ला ट्रोब विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किये गये क्लीनिकल ट्रायल में यह पता चला कि अस्थमा से ग्रसित बच्चों के भोजन में जब छह महीने तक वसा युक्त मछलियों से भरपूर पौष्टिक समुद्री भोजन को शामिल किया गया, तब उनके फेफड़े की कार्यप्रणाली में सुधार देखा गया।

यह अध्ययन 'ह्यूमन न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स' में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में बोला गया कि यह देखा गया है कि पौष्टिक भोजन बचपन में होने वाले अस्थमा के लिये संभावित अच्छा थैरेपी हो सकता है । ला ट्रोब के प्रमुख अनुसंधानकर्ता मारिया पैपमिशेल ने कहा, हम पहले से ही यह जानते हैं कि वसा, चीनी, नमक बच्चों में अस्थमा के बढ़ने को प्रभावित करता है व अब हमारे पास यह साक्ष्य है कि पौष्टिक भोजन से अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित करना संभव है ।

उन्होंने कहा, वसा युक्त मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं जिनमें रोग को रोकने में सक्षम गुण होते हैं । हमारे अध्ययन में यह पता चला कि हफ्ते में महज दो बार मछली खाने से अस्थमा से पीड़ित बच्चों के फेफड़े की सूजन अत्यंत कम हो सकती है ।

वास्तुकला का अदभुत नमूना है ये शिव मंदिर, विशालकाय चट्टानों को काटकर बनाया गया है इसे


वैसे तो पूरी दुनिया में भगवान शिव के जगह-जगह पर मंदिर बने हुए हैं लेकिन कुछ मंदिर इतने खास हैं कि विज्ञान भी उनकी टक्कर नहीं लेता है। आज हम आपको ऐसे ही एक शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। सातवीं सदी में बना इस शिव मंदिर को लेकर पुरातत्वविद इस बात पर आश्चर्यचकित हैं कि उस जमाने में इस तरह का आर्किटेक्ट बनाया कैसे गया, जबकि उस समय ऐसी तकनीक आई ही नहीं थी।


महाराष्ट्र के औरंगाबाद की 34 एलौरा की गुफाओं में से सबसे अदभुत है कैलाश मंदिर। किसी मंदिर या भवन को बनाते समय पत्थरों के टुकड़ों को एक के ऊपर एक जमाते हुए बनाया जाता है लेकिन कैलाश मंदिर बनाने में एकदम अनोखा ही तरीका अपनाया गया है। इसकी खासियत ये है कि इसे ऊपर से नीचे की ओर बनाया गया, जबकि आजकल इमारतों का निर्माण नीचे से ऊपर की ओर किया जाता है।

पत्थर काट-काट कर खोखला करके मंदिर, खम्बे, द्वार, नक्काशी आदि बनाई गयी। क्या अद्भुत डिजाइन और प्लानिंग की गयी होगी। इसके अतिरिक्त बारिश के पानी को संचित करने का सिस्टम, पानी बाहर करने के लिए नालियां, मंदिर टावर और पुल, महीन डिजाइन से बने खूबसूरत छज्जे, बारीकी से बनी सीढ़ियां, गुप्त अंडरग्राउंड रास्ते आदि सबकुछ पत्थर को काटकर बनाना सामान्य बात नहीं है।

मॉर्डन इंजीनियर्स मानते हैं कि आज के जमाने में वास्तुकला के इस तरह के अदभुत मंदिर को बनाने में साल नहीं, सदियां लग जाएंगी। जबकी प्राचीन काल में इसे बनाने में सिर्फ 18 साल लगे थे। इसके पीछे वो तर्क देते हैं कि इस तरह की तकनीक का कोई सिरा भारत में कही भी उपलब्ध ही नहीं है।

माना जाता है कि कैलाश मंदिर राष्ट्रकुल राजा कृष्ण प्रथम ने (756-773ई.) के दौरान बनवाया था। इसके अतिरिक्त इस मंदिर को बनाने का उद्देश्य, बनाने की टेक्नोलॉजी, बनाने वाले का नाम जैसी कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण लेख बहुत पुराना हो चुका है एवं लिखी गयी भाषा को कोई पढ़ नहीं पाया है। कहते हैं कि इसे हिमालय के कैलाश का रूप देने का भरपूर प्रयास किया गया है, इसीलिए इसे कैलाश मंदिर भी कहा जाता है।

इस मंदिर को करीब 40 हजार टन वजनी चट्टान को काटकर 90 फुट ऊंचा मंदिर बनाया गया। इस मंदिर में सामने नंदी विराजमान है और उसके दोनों ओर विशालकाय हाथी और स्तंभ खड़े हैं। साथ ही इसमें ईंट और पत्थरों को बिना सिर्फ एक चट्टान को काटकर बनाया गया है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस मंदिर के रहस्य को सुलझा नहीं पाए हैं। इसे देख कर हमें ये एहसास होता कि हमारे पूर्वज वास्तुकला के कितने बड़े जानकार थे।









इन 32 सालों में कितना बदल गया नीता अंबानी का लूक, तस्‍वीरों में देखें


अभी हाल ही में बिजनेसमैन मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के बेटे आकाश अंबानी और श्लोका की सगाई गोवा में हुई। ग्रैंड सगाई का फंक्शन मुंबई में आयोजित किया गया था।

हम आपको बता दें कि जहां एक ओर नीता अंबानी अपने सोशल वर्क के लिए जानी जाती है, वहीं दूसरी ओर वो अपने लुक को लेकर भी काफी चर्चा में रहती हैं। नीता अंबानी एक भारतीय महिला उद्यमी हैं।

उनके पिता बिरला की एक कंपनी में उच्चाधिकारी थे। नीता को भारतीय क्लासिकल डांस में शुरू से ही काफी रूचि थी और वो इस में ही अपना कैरियर बनाना चाहती थी लेकिन नीता अंबानी की शादी 1985 में मुकेश अंबानी के साथ हो गयी।

शादी के समय नीता 21 साल की थी और वो उस समय काफी स्लिम-ट्रिम थी लेकिन शादी के बाद उनका वजन 90 किलो तक बढ़ गया था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना वजन कम लिया। अब नीता अंबानी का वजन तकरीबन 57 किलो है।

नीता अंबानी मुंबई इंडियंस क्रिकेट टीम की सह-मालकिन भी हैं। वे रिलायंस इंडस्ट्रीज और नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड के “दृष्टि” नामक समाज सेवी संस्था से भी जुड़ी हैं।

नीता ने अपने कई रियर फोटोज भी इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं| भले ही नीता देश के सबसे अमीर आदमी की पत्नी हैं लेकिन उन्हें आम आदमियों की तरह जीना पसंद हैं| वैसे तो नीता अंबानी की लाइफ काफी ग्लैमर से भरी है लेकिन उन्हें आम लोगों की तरह जीना बहुत पसंद हैं।

इस देश में लकड़बग्घों को बुलाया जाता है दावत पर, खिलाते हैं अपने हाथ से खाना



दुनिया के तमाम कोनों में इंसानी बस्तियां बसती जा रही हैं। नतीजा ये कि इस धरती के दूसरे बाशिंदों यानी दूसरे जानवरों के लिए जगह कम पडती जा रही है। नतीजा ये कि जंगली जानवर इंसानी बस्तियों पर धावा बोल रहे हैं।


अफ्रीका के चितकबरे लकड़बग्घे शिकार के लिए बहुत बदनाम हैं। वो शेरों के बाद अफ्रीका के दूसरे बडे शिकारी जानवर माने जाते हैं। ये लकड़बग्घे अफ्रीका के कई देशों में बस्तियों पर धावा बोलते रहते हैं।


मगर दिलचस्प किस्सा ये है कि इथियोपिया में एक शहर ऐसा है, जहां के लोग इन खतरनाक लकड़बग्घों को दावत पर बुलाते हैं। इथियोपिया के इस शहर का नाम है हरार।

हरार में रहने वाले यूसुफ ऐसे शख्स हैं जो इन खतरनाक लकड़बग्घों को अपने हाथ से खिलाते हैं। उन्होंने इन लकड़बग्घों से अच्छा राब्ता बना लिया है। यूसुफ इन लकड़बग्घों को अपने घर में बुलाकर दावत देते हैं। अपने हाथ से मांस खिलाते हैं।

दुनिया पर इंसान की दादागीरी चलती है। ऐसे में जानवरों के लिए इंसानी बस्तियों में रहना आसान नहीं है। लेकिन दुनिया में कई ऐसे जानवर हैं, जिन्होंने इंसानों के बीच जाना-आना सीख लिया है।

मुंबई में अक्सर तेंदुए रिहाइशी बस्तियों में घुस आते हैं। ये स्थानीय लोगों के पालतू जानवरों को अपना शिकार बनाते हैं। कई बार ये तेंदुए इंसानों पर भी हमला कर देते हैं। हालांकि ये हमला अक्सर वो घबराहट में करते हैं।

इसी तरह न्यूयॉर्क में शिकारी बाज बहुमंजिला इमारतों के बीच मंडराते दिख जाते हैं। वो इंसानों के बीच अपना शिकार तलाशते हैं।

वहीं रोम के अर्श पर अक्सर लोगों को स्टार्लिंग नाम के परिंदों के झुंड दिखाई दे जाते हैं। ये शर्मीले पक्षी अब इंसानों के बीच रहना सीख गए हैं।


हमारे पुरखे कहे जाने वाले बंदर वो जानवर हैं, जो सबसे ज्यादा इंसान के पास रहते देखे गए हैं। इनके झुंड मथुरा-आगरा से लेकर जयपुर और चित्रकूट तक लोगों को परेशान करते, सामान छीनते देखे जा सकते हैं। बंदरों के लिए इंसानों के बीच रहना आम बात हो गई है।

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला पक्षी बॉवर इंसानों की चीजों से अपना घोंसला बनाता है, ताकि मादा को लुभा सके। इसके लिए वो अक्सर इंसानों के रंग-बिरंगे सामान चुरा ले जाता है।


कुल मिलाकर हम ने कुदरत के संसाधनों पर जिस तरह से एकाधिकार कर लिया है, उससे बाकी जानवरों के लिए जिंदगी बेहद मुश्किल हो गई है। नतीजा वो जिंदगी को दांव पर लगाकर इंसानों के बीच आते हैं, ताकि अपने रहने-खाने का इंतजाम कर सकें।













एकदम हुबहू दीपिका पादुकोण जैसी दिखती है ये एक्‍ट्रेस, पहली बार में आप भी खा जाएंगे धोखा


हम अक्सर सुनते हैं की इस दुनिया में एक ही शक्ल के 7 लोग होते हैं। हालांकि बहुत सारे लोग इसे नहीं मानते हैं लेकिन ये बात बिल्कुल सच है कि कुछ लोगों की शक्ल आपस में इतनी मिलती है कि एक बार में देखकर हम धोका खा जाते हैं और विश्वास नहीं होता हैं की सच में कोई एक जैसा हो सकता हैं|

जी हाँ आज हम आपको बॉलीवुड की नंबर वन एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण की हमशक्ल से मिलवाने वाले हैं| वैसे तो दीपिका की तुलना हॉलीवुड एक्ट्रेस इरिना श्याक से की जाती है लेकिन दीपिका की हमशक्ल एक और हैं वो हैं साउथ की एक्ट्रेस जिनकी शक्ल हूबहू दीपिका से मिलती हैं|

बॉलीवुड की नंबर वन अभिनेत्री दीपिका पादुकोण हैं| वो जिस फिल्म में काम करती हैं उस फिल्म का सफल होना लाजमी हैं| ऐसे में यदि इनकी शक्ल का कोई और मिल जाए तो फिर उसके लिए ये बड़ी बात हो जाती है। ये हैं दीपिका की हमशक्ल तस्वीर देखकर आप भी धोखा खा गए ना। जी हाँ ये दीपिका नहीं बल्कि उनकी हमशक्ल है। दीपिका की हमशक्ल भी कोई आम लड़की नहीं बल्कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री की एक एक्ट्रेस है।

दीपिका की हमशक्ल का पूरा नाम अमाला पॉल है। जिनका जन्म 26 अक्टूबर 1991 को केरल के एर्नाकुलम में हुआ| अमाला को साउथ की दीपिका पादुकोण कहा जाता है। अमाला को मलयालम डायरेक्टर लाल जोस ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘नीलाथमारा’ में सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए चुना| इसी फिल्म से अमाला ने साउथ के इंडस्ट्री में डेव्यू किया|

यह अमाला के करियर का पहला फिल्म था| अमाला ने साउथ के डायरेक्टर सामी की फिल्म ‘सिंधु समवेली’ में में अपने ससुर से प्यार कर बैठती हैं। इसके अलावा इस फिल्म में इनका अफेयर भी शुरू हो जाता है। इस फिल्म के बाद अमाला की काफी आलोचना भी हुई थी| अमाला से एक इंटरव्यू में पूछा गया की आपकी तुलना दीपिका पादुकोण से की जाती हैं तो आप कैसा फिल करती हैं|

इस सवाल पर अमाला ने जवाब दिया की ‘ यह मेरे लिए गर्व की बात हैं की लोग मेरी तुलना दीपिका से करते हैं लेकिन दीपिका मेरे से ज्यादा खूबसूरत हैं|’ अमाला ने साउथ के विरासेकरन, बेजवड़ा, लव फेल्योर, रन बेबी रन, नायक, थलाइवा, मिली, पसंगा2 इत्यादि जैसी तमिल, तेलगु और मलयालम फिल्में की हैं| अमाला की आँखें दीपिका से एकदम से मिलती हैं| इनकी आँखों को देखकर दीपिका की याद आ ही जाती हैं|


कहां-कहां इस्तेमाल हुआ है आपका आधार कार्ड, चुटकी में करें पता


आपके आधार कार्ड का कब, किसने और कहां इस्तेमाल किया है, इसका पता लगाना बेहद आसान हो गया है. आप UIDAI की वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी हासिल कर सकते है.

बहुत सारे लोग अपने आइडेंटिटी कार्ड के रूप में आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. लोग ट्रेन के सफर से लेकर बैंक, डाकखाने, पासपोर्ट बनाने और सरकारी स्कीमों का फायदा लेने में आधार कार्ड का यूज करते हैं. हालांकि, आधार का इस्तेमाल करने के साथ ही कई बार यह ख्याल भी आता है कि कहीं कोई हमारे आधार नंबर का गलत इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है या कि‍सी ऐसी जगह तो आधार का यूज नहीं हो रहा है, जिसकी आपने इजाजत ही न दी हो. अगर आप भी इस बात को लेकर परेशान हैं तो हम आपको बता रहे हैं, ऐसा तरीका जिसकी मदद से आप यह जान सकते हैं कि आपके आधार कार्ड का कहां-कहां और कब-कब इस्तेमाल हुआ है. बहुत सारे लोग अपने आइडेंटिटी कार्ड के रूप में आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. लोग ट्रेन के सफर से लेकर बैंक, डाकखाने, पासपोर्ट बनाने और सरकारी स्कीमों का फायदा लेने में आधार कार्ड का यूज करते हैं. हालांकि, आधार का इस्तेमाल करने के साथ ही कई बार यह ख्याल भी आता है कि कहीं कोई हमारे आधार नंबर का गलत इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है या कि‍सी ऐसी जगह तो आधार का यूज नहीं हो रहा है, जिसकी आपने इजाजत ही न दी हो. अगर आप भी इस बात को लेकर परेशान हैं तो हम आपको बता रहे हैं, ऐसा तरीका जिसकी मदद से आप यह जान सकते हैं कि आपके आधार कार्ड का कहां-कहां और कब-कब इस्तेमाल हुआ है.

बहुत सारे लोग अपने आइडेंटिटी कार्ड के रूप में आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. लोग ट्रेन के सफर से लेकर बैंक, डाकखाने, पासपोर्ट बनाने और सरकारी स्कीमों का फायदा लेने में आधार कार्ड का यूज करते हैं. हालांकि, आधार का इस्तेमाल करने के साथ ही कई बार यह ख्याल भी आता है कि कहीं कोई हमारे आधार नंबर का गलत इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है या कि‍सी ऐसी जगह तो आधार का यूज नहीं हो रहा है, जिसकी आपने इजाजत ही न दी हो. अगर आप भी इस बात को लेकर परेशान हैं तो हम आपको बता रहे हैं, ऐसा तरीका जिसकी मदद से आप यह जान सकते हैं कि आपके आधार कार्ड का कहां-कहां और कब-कब इस्तेमाल हुआ है.

यूनीक आइडेंटि‍फि‍केशन अथॉरि‍टी ऑफ इंडि‍या ने आपके आधार का कहां-कहां इस्तेमाल हो रहा है, इसे जानने की सुवि‍धा दी है. आप इन स्टेप के जरिए इसे पता कर सकते हैं.

स्टेप-1: सबसे पहले आपको आधार ऑथेंटि‍केशन हि‍स्‍ट्री पेज पर जाना होगा. इसके लिंक https://resident.uidai.gov.in पर क्लिक करना होगा. यहां आधार सर्वि‍सेज के नीचे आपको Aadhaar Authentication History लि‍खा दि‍खेगा, इस पर क्‍लि‍क करें.


स्टेप-2: इसके बाद यहां अपना आधार नंबर और तस्‍वीर में दि‍या हुआ सि‍क्‍योरि‍टी कोड डालें.


स्टेप-3: फिर आप ओटीपी जेनरेट करने के लि‍ए क्‍लि‍क करें.

स्टेप-4: इसके बाद आपके रजि‍स्‍टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा.

स्टेप-5: ओटीपी आने के बाद इसे सबमि‍ट कर दें. ओटीपी भरने से पहले आपको वह समय सीमा भी चुननी होगी, जि‍सके डि‍टेल आपको चाहि‍ए.

स्टेप-6: इसके बाद आपको तारीख और समय के हि‍साब से पूरी डि‍टेल मि‍ल जाएगी कि आपके आधार को कहां-कहां यूज कि‍या गया है. यानी कि‍तनी बार आपके आधार को वैरि‍फाई करने के लि‍ए अथॉरि‍टी के पास रि‍क्‍वेस्‍ट आई है.

स्टेप-7: अगर आपको कुछ गड़बड़ दि‍खती है तो आपको इसकी शि‍कायत कर सकते हैं. आप अपनी आधार जानकारी को ऑनलाइन लॉक भी कर सकते हैं.