Wednesday, 15 May 2019

अब पाकिस्तान को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब, बॉर्डर पर एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करेगा भारत


बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के कुछ विमान इस तरफ घुस आए थे, ऐसे में ये एयर डिफेंस यूनिट
उसी का जवाब माना जा रहा है. जम्मू-कश्मीर में इंडियन आर्मी ने एक बड़ी एक्सरसाइज़ के तहत एयर डिफेंस सिस्टम को सीमा के पास ले जाना तय किया है. ये फैसला सेना में एक बड़ी बैठक के बाद लिया गया है, जिसमें सेना अध्यक्ष बिपिन रावत समेत बड़े अधिकारी उपस्थित थे.

इस बैठक में सीमा पर लगे एयर डिफेंस यूनिट की समीक्षा की गई. बैठक में सामने आया कि अगर भविष्य में दोबारा कभी बालाकोट के बाद जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो इनका उपयोग किया जा सके. अभी ये सभी यूनिट सीमा से दूर हैं और हर तनावपूर्ण स्थान पर तैनात हैं. दरअसल, बालाकोट में जब भारत ने हवाई हमला किया था, तो उसके अगले ही दिन पाकिस्तान ने अपने कई फाइटर जेट को भारत में भेजा था.

साल में सिर्फ 5 घंटे के लिए खुलता है ये मंदिर, महिलाओं के लिए बने हैं ये खास नियम


भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जो अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए हैं। इन रहस्यों के कारण ही ये मंदिर दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने आप में बेहद अनोखा है। खास बात ये है कि यह मंदिर साल में सिर्फ पांच घंटे के लिए ही खुलता है। साथ ही यहां महिलाओं के लिए भी कई खास नियम बनाए गए हैं।

दरअसल हम बात कर रहे हैं निरई माता मंदिर की। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। निरई माता के मंदिर में सिंदूर, सुहाग, श्रृंगार, कुमकुम, गुलाल, बंदन नहीं चढ़ाया जाता बल्कि नारियल और अगरबत्ती से माता को प्रसन्न किया जाता है।

आमतौर पर मंदिरों में जहां दिन भर देवी-देवताओं की पूजा होती है, तो वहीं निरई माता के मंदिर में केवल 5 घंटे ही यानी सुबह 4 बजे से 9 बजे तक माता के दर्शन किए जा सकते हैं। बाकी दिनों में यहां आना प्रतिबंधित होता है। जब भी यह मंदिर खुलता है, यहां माता के दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचते हैं। 

कहते हैं कि निरई माता मंदिर में हर साल चैत्र नवरात्र के दौरान अपने आप ही ज्योति प्रज्जवलित होती है। यह चमत्कार कैसे होता है, यह आज तक पहेली ही बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निरई देवी का ही चमत्कार है कि बिना तेल के ज्योति नौ दिनों तक जलती रहती है।

निरई माता मंदिर में महिलाओं को प्रवेश और पूजा-पाठ की इजाजत नहीं है। यहां सिर्फ पुरुष ही पूजा-पाठ की रीतियों को निभाते हैं। महिलाओं के लिए इस मंदिर का प्रसाद खाना भी वर्जित है। कहते हैं कि महिलाएं अगर मंदिर का प्रसाद खा लें तो उनके साथ कुछ न कुछ अनहोनी हो जाती है।





मस्जिद में नमाज के दौरान पापा के ऊपर बच्ची ने किया कुछ ऐसा, Video हो गया Viral





सोशल मीडिया पर मस्जिद में एक छोटी सी बच्ची का वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल, एक मस्जिद में कुछ मुस्लिम भाई नमाज अदा कर रहे होते हैं इसी दौरान एक छोटी प्यारी सी बच्ची अपने पिता की पीठ से गिरती हुई दिखाई देती है। हालांकि, मस्जिद में मौजूद सभी नमाजी बिना इस ओर कोई ध्यान दिए नमाज में पूरी तरह से मशगूल दिखाई दे रहे हैं।

बता दें कि, जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के ऐतिहासिक जामा मस्जिद में एक छोटी बच्ची का प्यारा सा वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक छोटी सी बच्ची दौड़कर आती है और नमाज अदा कर रहे अपने पिता की पीठ पर खेलने लगती है। नमाज के दौरान सजदे में पिता दो बार सिर झुकाता है इसी दौरान बच्ची भी इसे दोहराती है। 

हालांकि, ट्विटर पर साझा किए गए वीडियो में छोटी बच्ची अपने पिता की पीठ से गिरती हुई दिखाई देती है। इस दौरान पिता नमाज अदा करने में पूरी तरह मशगूल रहते हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को काफी शेयर किया जा रहा है। ट्विटर पर इस वीडियो को ईशान वानी नाम के यूजर ने सबसे पहले ट्वीट किया है।

इस छोटी सी बच्ची के वायरल वीडियो पर लोग कई तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। @Akhil_Aqeel ने लिखा कि हर बच्चा घर पर मां के प्रार्थना करने के दौरान ऐसा करता है, लेकिन एक दिन न भूलने वाला थप्पड़ पड़ता है और यह खत्म हो जाता है।

ट्विटर यूजर @manohar ने लिखा कि एक बच्चे को खुशी मिल गई तो समझो ऊपर वाले के पास दुआ कुबूल हो गई। यूजर ‏@saurabh ने लिखा कि ऊपर वाला दुआ कुबूल करने के नए-नए तरीके निकालता रहता है, इस बार इस बच्चे की खुशी के जरिए।

Tuesday, 14 May 2019

जिस लड़की के पैदा होने पर पूरे परिवार को हुआ अफसोस, आज बॉलीवुड में उसका गजब जलवा


हिन्दुस्तान में आज भी कई ऐसे परिवार हैं जो अपने घर में बेटी पैदा होने की ख़ुशी नहीं मनाते हैं. इससे बुरा क्या हो सकता हैं की कई लोग हमारे समाज में ऐसे भी हैं जो बेटियों के पैदा होने से पहले ही उसे माँ की कोख में ही मार देते हैं. ऐसे लोग इस बात से अनजान होते हैं की सब अपनी किस्मत ईश्वर से लिखवा कर लाते हैं. आज हम आपको बॉलीवुड की एक ऐसी ही अभिनेत्री के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें उनके पिता माँ की गोद में ही मार देना चाहते थे लेकिन आज वो मेहनत और लगन के दम पर अपना अलग मुकाम बना चुकी हैं.



आपको बता दें की आज हम जिस मशहूर एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं वो कमांडो फेम पूजा चोपड़ा है. जी हाँ बॉलीवुड में एक लीड एक्ट्रेस के तौर पर पूजा ने अपने करियर की शुरुवात विद्युत् जम्बाल के साथ फिल्म 'कमांडो' से की थी. आज पूजा चोपड़ा बॉलीवुड सहित पुरे देश में एक जाना पहचाना नाम है. एक इंटरव्यू के दौरान पूजा ने खुद बताया था की जब वो अपनी माँ की पेट में थी और उनके पिता को मालूम चला था की उनके घर बेटी पैदा होने वाली है तो उन्होनें ने साफ़ बोल दिया था की उन्हें बेटी नहीं चहिये. पूज एके पिता ने उनकी माँ पर काफी दवाब भी बनाया था की वो बच्चा गिरा दें लेकिन उनकी माँ ने ये बात नहीं मानी और लाख विरोध के वाबजूद भी उन्होनें पूजा को जन्म दिया . पूजा के जन्म के बाद उनके पिता ने उनकी माँ को घर से निकाल दिया था और उन्हें देखने तक हॉस्पिटल भी नहीं गए थे.



पूजा ने बताया की इसके बाद तब से लेकर आजतक उनकी माँ ने ही पूजा और उनकी बहन की के देखभाल की है. पिता द्वारा घर से निकाले जाने के बाद पूजा की माँ अपनी दोनों बेटियों के साथ अपने मायके मुंबई आगयी थी. पूजा चोपड़ा ने बताया की उनकी माँ ने उन्हें और उनकी बहन को दुनिया का सामना करने की हिम्मत दी है और इसलिए उन्होनें जाना है की लडकियां किसी से कम नहीं होती है.

3 मई 1986 को कोल्कता में पैदा हुई पूजा ने 2009 में मिस इंडिया वर्ल्ड का खिताब भी अपने नाम किया था और 2011 में उन्होनें मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भी भाग लिया था जिसमे वो सेमिफिनल तक पहुंची थी. पूजा अपनी सफलता का सारा क्रेडिट अपनी माँ को देती है.

पीली साड़ी के बाद अब ये महिला पोलिंग अधिकारी सोशल मीडिया पर मचा रही धमाल


6वें चरण में भोपाल में होने वाले मतदान के दौरान भी नीली ड्रेस में एक बेहद खूबसूरत महिला पोलिंग अफसर की फोटो ने सोशल मीडिया में सनसनी मचा दी थी.

उनकी एक फोटो मध्य प्रदेश के साथ ही पूरे देश में आग की तरह वायरल हुई थी. जिसमें महिला ने नीली ड्रेस पहने और सनग्लास लगा रखा था. नीली साड़ी वाली पोलिंग अधिकारी का नाम योगेश्वरी गोहिते ओंकार है और वह मध्यप्रदेश के बैतूल की मूल निवासी हैं. वो भोपाल में रहती हैं और केनरा बैंक की कुंजननगर ब्रांच में प्रोविजनरी अधिकारी हैं. योगिश्वरी गोहिते के परिवार में उनका पुत्र  रोमिल, सास और पति हैं. उनके पति इंडियन आर्मी में मेजर के पद पर हैं.

जब उनसे सवाल किया गया कि अखबारों और सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने पर आपका रिएक्शन कैसा था, योगेश्वरी जी ने जवाब देते हुए कहा कि, 'मुझे खुशी होती है जब आपको अपने काम के साथ पहचान मिलती हैं।

बेकार पड़ी चीजों से बनाया ऐसा गार्डन, दुनिया भर में छाया


चंडीगढ़ में सुखना झील के निकट स्थापित रॉक गार्डन टूरिस्टों के बीच बेहद प्रसिद्ध है। इसके बनने के पीछे की कहानी भी उतनी ही खास है।

आइए इसके बारे में जानते हैं। चंडीगढ़ में स्थित रॉक गार्डन एक सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह मूल रुप से एक स्कल्पचर गार्डन है। इसकी स्थापना नेक चांद सैनी के द्वारा की गई थी। इसलिए इसे नेक चांद रॉक गार्डन भी कहा जाता है।

वर्तमान में ये गार्डन 40 एकड़ एरिया में फैला हुआ है। इस गार्डन के संस्थापक नेक चांद का निधन 90 वर्ष की आयु में हो गया था। इस गार्डन की खासियत ये है कि यह गार्डन कूड़े, कर्कट, सिरैमिक, प्लास्टिक बोतलों, पुरानी चूडिय़ों शीशों और पुराने टाइल्स इतियादि की मदद से बनाया गया है।

एक प्रकार से यह वेस्ट मैनेजमेंट का एक बड़ा उदाहरण है। चंडीगढ़ का रॉक गार्डन आज इतना फेमस हो गया है कि यहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आ चुके हैं।

सिख पुलिस वाले ने रमज़ान में भूखे बच्चे को खिलाया खाना, वीडियो हो रहा वायरल


जम्मू-कश्मीर में पुलिस के कामकाज के तरीकों पर अक्सर सवल खड़े होते रहते हैं. इतना ही नहीं पुलिस पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप भी लगता रहता है. इसी बीच एक वीडियो ऐसा चल रहा है जो आपको भी अच्छा लगेगा.

बता दें, इन सबके बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पुलिस का जवान एक बच्चे को अपने हाथ से खाना खिला रहा है और पानी पिला रहा है. बताया जा रहा है कि बच्चा मानसिक रूप से कमज़ोर है. इस वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है. वहीं ये पुलिस वाला कौन है और इसका नाम क्या है इसकी पहचान अब तक नहीं हो पाई है. इसे सोशल मीडिया पर अब तक काफी सारे लोग पोस्ट कर चुके हैं. वहीं लोग इस सिख पुलिस वाले की तारीफ करते नहीं तक रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है जिसके कैप्शन में लिखा है वी केयर, यानी हम ध्यान रखते हैं।

अनोखा मंदिर- जहां माता की मूर्ति के पीछे खुदी है रहस्यमयी लिपि


बालूमाथ और औद्योगिक नगरी चंदवा के बीच एनएच 99 रांची मार्ग पर नगर नामक स्थान में एक अति प्राचीन मंदिर है जो भगवती उग्रतारा को समर्पित है. यह एक शक्तिपीठ है. मान्यता है कि यह मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुराना है. इस मंदिर के निर्माण में टोरी स्टेट के शासक पीतांबर नाथ शाही और पुन:निर्माण में रानी अहिल्याबाई का नाम जुड़ा हुआ है. मंदिर निर्माण से जुड़ी मान्यताएं पलामू के गजट 1961 में दर्शाया गया है. इसके साथ हो मंदिर में एक लिपि का भी रहस्य है.

दरअसल, बालूमाथ से 25 किलोमीटर दूर प्रखंड के श्रीसमाद गांव के पास तितिया या तिसिया पहाड़ के पास पुरातत्व विभाग को चतुर्भुजी देवी की एक मूर्ति मिली है, जिसके पीछे अंकित लिपि को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह लिपि न तो ब्राह्मी है और न ही देवनागरी या भारत की अन्य कोई लिपि. भारत में अब तक ज्ञात सभी लिपियों से अलग इस लिपि को क्या कहा जाए यह पुरात्वविदों और शोधकर्ताओं के लिए अभी भी एक पहेली बनी हुई है।

मंगलवार, 14 मई: जानिए आज के पेट्रोल-डीजल के भाव


आज यानि 14 मई को दिल्ली में पेट्रोल का दाम आज 71 रुपये प्रति लीटर है। डीजल 65 रुपये में बिक रहा है। सभी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर कीमतें समान हैं।

पेट्रोल।

जयपुर में एक लीटर पेट्रोल 72 रुपये प्रति लीटर।

मुंबई में एक लीटर पेट्रोल 77 रुपये प्रति लीटर।

कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल 73 रुपये प्रति लीटर।

चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल 74. रुपये प्रति लीटर।

डीजल।

जयपुर में एक लीटर डीजल 68 रुपये प्रति लीटर।

मुंबई में एक लीटर डीजल 69 रुपये प्रति लीटर।

कोलकाता में एक लीटर डीजल 67 रुपये प्रति लीटर।

चेन्नई में एक लीटर डीजल 69 रुपये प्रति लीटर है।

सिलसिली द्वीप के संग्रहालय में 8 हजार लाशों और 1252 ममी की प्रदर्शनी



इटली के स्वायत्त द्वीप सिलसिली के पालेर्मो कैपुचिन संग्रहालय में रखी 8 हजार लाशों के साथ ही 1252 से ज्यादा ममी की प्रदर्शनी लगाई गई है। इसे मृतकों का शहर कहा जाता है। यहां 16वीं सदी में ईसाई  भिक्षुओं ने शवों को दफनाने और ममी को रखने का काम शुरू किया गया था। अब आम लोग आकर अज्ञात मृतकों की ममी को देख सकते हैं।

पहले यह जगह कब्रिस्तान था, जिसे संग्रहालय में बदला गया और शवों को ममी के जरिए सुरक्षित रखा गया। 1920 से यहां शवों का रखने का काम बंद कर दिया गया और इसे संग्रहालय में बदल दिया गया। इस विचित्र संग्रहालय को भिक्षु ही चला रहे हैं। इसमें ममी को कब्रो और ताबूत के अंदर विभिन्न अवस्था में देखा जा सकता है। कुछ ममी पूरी तरह सुरक्षित हैं, तो कुछ छिन्न-भिन्न अवस्था में पहुंच गई हैं।

 ममी बनाने में 70 दिन का समय लगता था। इसे बनाने के लिए धर्मगुरुओं के साथ-साथ विशेषज्ञ की टीम बनाई जाती थी, जो इस काम को अंजाम देते थे। ममी शब्द प्राचीन मिस्र का नहीं, बल्कि अरबी भाषा के मुमिया से बना है, जिसका मतलब होता है मोम या तारकोल के लेप से सुरक्षित रखी गई चीज है। ममी बनाने का काम मिस्र में बहुत ही धार्मिक श्रद्धा भाव से किया जाता था।